भारत की डिजिटल और तकनीकी नवाचार पर आधारित नई अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र का राजस्व जो FY26 में लगभग 100 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है, वह FY31 तक बढ़कर 300 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। इस विकास में AI, डिजिटल इनोवेशन और नॉलेज कैपिटल की भूमिका अहम मानी जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, खपत पर आधारित क्षेत्र जैसे रिटेल, उपभोक्ता सामान और मनोरंजन इस विकास का मुख्य केंद्र बने रहेंगे। उम्मीद है कि ये क्षेत्र सालाना 25 प्रतिशत की दर से बढ़ते हुए FY31 तक 150 बिलियन डॉलर के स्तर को छू लेंगे। इसके साथ ही, टेक्नोलॉजी, मीडिया और टेलीकॉम (TMT) जैसे उभरते तकनीकी क्षेत्र भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जिनकी वृद्धि दर सालाना 26 प्रतिशत रहने की संभावना है। कंपनियों की सामूहिक लाभप्रदता भी FY25 में 1.4 बिलियन डॉलर के सकारात्मक स्तर पर पहुंच गई है।
उपभोक्ता ब्रांडों के लिए भी बाजार का माहौल अनुकूल है। D2C चैनलों और क्विक कॉमर्स के विस्तार ने ब्रांड निर्माण की गति को तेज कर दिया है। साल 2020 में शुरू हुए ब्रांडों को 100 करोड़ रुपये के राजस्व तक पहुंचने में औसतन 3.4 वर्ष का समय लगा है, जो 2016 के ब्रांडों के मुकाबले काफी कम है। रेडसीर की रिपोर्ट के अनुसार, 100 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व वाली नई कंपनियों की संख्या FY31 तक 500 तक पहुंच सकती है।
निवेश के मोर्चे पर भी नई अर्थव्यवस्था को बड़ी गति मिलने की उम्मीद है। निजी बाजार फंडिंग के FY26 में 17 बिलियन डॉलर तक बढ़ने का अनुमान है, जिसमें BFSI, TMT और AI क्षेत्रों का बड़ा योगदान रहेगा। अनुमान है कि CY30 तक सार्वजनिक और निजी फंडिंग मिलकर सालाना 50 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर लेंगी। इस अवधि तक नई कंपनियों की भारतीय IPO में हिस्सेदारी 40 प्रतिशत तक होने की संभावना है, जो वर्तमान में 25 प्रतिशत है।