आर्थिक जगत में भारत के विकास को लेकर एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी Moody's ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की वास्तविक GDP विकास दर के अनुमान को संशोधित कर 7% कर दिया है, जो पहले 6% रहने का अनुमान था। एजेंसी ने यह निर्णय पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की लचीली स्थिति को देखते हुए लिया है।
एजेंसी का मानना है कि अन्य G-20 देशों और समान रेटिंग वाले उभरते बाजारों की तुलना में भारत की विकास दर तेज बनी रहने की उम्मीद है। हालांकि, संस्था ने भविष्य के जोखिमों के प्रति आगाह भी किया है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बढ़ती ऊर्जा कीमतों और अल नीनो के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतों में आया उछाल महंगाई, उपभोग और विकास के लिए चुनौतियां पैदा कर सकता है।
Moody's ने उल्लेख किया कि पश्चिम एशिया में पैदा हुए तनाव पर भारत की राजकोषीय नीति की प्रतिक्रिया संतुलित रही है, लेकिन ऊर्जा की बढ़ती वैश्विक कीमतों के कारण सब्सिडी पर खर्च बढ़ने का दबाव सरकार पर बन सकता है। इसके अलावा, रक्षा और बुनियादी ढांचे पर बढ़ता खर्च भी राजकोषीय समेकन की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
हाल ही में सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था में 7.8% की वृद्धि दर्ज की गई थी। इस अवधि में निवेश और विनिर्माण गतिविधियों में तेजी ने खनन और उपभोक्ता सेवाओं में देखी गई कमजोरी को बेअसर कर दिया। यह डेटा 18 सितंबर 2026 को सामने आया था, जिसमें विकास दर उम्मीदों से बेहतर रही। रेटिंग एजेंसी अब वित्त वर्ष FY27 तक के परिदृश्य पर नजर बनाए हुए है, ताकि वैश्विक और घरेलू कारकों के प्रभाव का आकलन किया जा सके।