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सीआरपीएफ के पूर्व हवलदार गिरवर सिंह को 27 साल बाद मिली जीत, फिर पहना वर्दी का गौरव

🇮🇳 राष्ट्रीय 📅 2 सितम्बर 2026 · By BolHind Bureau
सीआरपीएफ के पूर्व हवलदार गिरवर सिंह को 27 साल बाद मिली जीत, फिर पहना वर्दी का गौरव
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मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के रहने वाले गिरवर सिंह तोमर ने एक ऐसी कानूनी लड़ाई जीती है, जो मिसाल बन गई है। वर्ष 1991 में सीआरपीएफ में हवलदार के पद पर भर्ती हुए गिरवर सिंह का करियर आठ साल की सेवा के बाद तब थमी, जब एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ विवाद के चलते उन्हें 1999 में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। नौकरी जाने के बाद गिरवर सिंह वापस मुरैना लौट आए और अध्यात्म की राह पकड़ ली। उन्होंने अपना जीवन एक मंदिर और बाद में एक गुफा मंदिर में पूजा-पाठ और ध्यान में समर्पित कर दिया, जहां उन्हें गिरवर दास महाराज के नाम से जाना जाने लगा।

हालांकि, खाकी वर्दी और अपने कर्तव्यों के प्रति उनका मोह कम नहीं हुआ। 1999 में ही उन्होंने अपनी बर्खास्तगी को चुनौती देते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कानूनी संघर्ष का यह सफर लंबा रहा, जिसमें 2007 में कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में आया, लेकिन सीआरपीएफ ने उस पर स्टे ले लिया। मामला वर्षों तक अदालती गलियारों में घूमता रहा। अंततः अगस्त 2025 में हाई कोर्ट की डबल बेंच ने एक बार फिर उनके हक में फैसला सुनाते हुए उन्हें बहाल करने का आदेश दिया।

अदालती आदेश के बाद भी प्रक्रिया आसान नहीं थी। उन्होंने अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजे और अपनी बहाली के लिए निरंतर प्रयास जारी रखा। आखिरकार, 27 साल का लंबा इंतजार खत्म हुआ और अगस्त के महीने में उन्हें फिर से सीआरपीएफ में शामिल कर लिया गया। अब वे छत्तीसगढ़ के बीजापुर में अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। दो दशक से अधिक समय तक तपस्वी का जीवन बिताने के बाद, उन्होंने फिर से अपनी पुरानी वर्दी पहनी है, जो उनके दृढ़ संकल्प और धैर्य का प्रमाण है।

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