मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच हुई सैन्य कार्रवाई के बाद बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखी गई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति और ब्याज दरों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जिसका सीधा असर निवेशकों के भरोसे पर पड़ा है। बुधवार सुबह कारोबार की शुरुआत के साथ ही सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सुबह 9:33 बजे तक बीएसई सेंसेक्स 612.09 अंक यानी 0.80 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,332.19 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 50 सूचकांक 228.45 अंक या 0.95 प्रतिशत टूटकर 23,827.35 के स्तर पर आ गया। बाजार की यह सुस्ती व्यापक रही, जिसमें ऑटो, रियलिटी और आईटी जैसे प्रमुख सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। निफ्टी ऑटो इंडेक्स में 2.03 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि रियलिटी और आईटी इंडेक्स भी लाल निशान में रहे। वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमतें 1 प्रतिशत बढ़कर 95.4 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। भारत अपनी अधिकांश तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी घरेलू बाजार के लिए चिंताजनक बनी हुई है। जानकारों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो यह न केवल देश के चालू खाता घाटे और रुपये की स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं, बल्कि कॉरपोरेट लागत और महंगाई को भी बढ़ा सकती हैं। भारतीय बाजारों के साथ-साथ एशिया के अन्य बाजारों में भी तनाव का असर दिख रहा है, जहां बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी देखी जा रही है। बाजार में छाई इस अनिश्चितता के कारण इंडिया VIX, जो बाजार की अस्थिरता को दर्शाता है, 4 प्रतिशत बढ़कर 11.95 के स्तर पर पहुंच गया है। फिलहाल, भू-राजनीतिक हालात और तेल की बढ़ती कीमतों का यह मेल निवेशकों के लिए सतर्क रहने का संकेत दे रहा है।