एचआईवी (HIV) के उपचार में एक महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना बन रही है। हाल ही में हुए एक चरण 3 (Phase 3) के ट्रायल में एक ऐसी नई दवा सामने आई है, जिसे हर दिन के बजाय हफ्ते में सिर्फ एक बार लेने की जरूरत होती है। शोध के परिणाम बताते हैं कि यह साप्ताहिक गोली वायरल लोड को नियंत्रित रखने में उतनी ही प्रभावी है, जितनी वर्तमान में चल रही रोजाना की दवाएं। इस अध्ययन के निष्कर्षों को रियो डी जनेरियो में आयोजित इंटरनेशनल एड्स कॉन्फ्रेंस में पेश किया गया और इसके बाद इसे द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित किया गया।
इस शोध में 14 देशों के 626 वयस्कों को शामिल किया गया था। इनमें से आधे लोगों ने अपनी पुरानी दैनिक दवा को छोड़कर इस नई साप्ताहिक टैबलेट (इस्लात्राविर और लेनाकापाविर का मिश्रण) को लेना शुरू किया, जबकि बाकी लोगों ने अपनी पुरानी उपचार पद्धति जारी रखी। 48 सप्ताह के परीक्षण के बाद देखा गया कि साप्ताहिक दवा लेने वाले लगभग सभी प्रतिभागियों में वायरस पूरी तरह नियंत्रित रहा। शोधकर्ताओं ने पाया कि मरीजों ने इसे लेने में काफी रुचि दिखाई और इसे दैनिक उपचार की तुलना में कम बोझिल बताया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह दवा उन मरीजों के लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है जिनका एचआईवी पहले से ही बेहतर तरीके से नियंत्रित है। हालांकि, यह अभी हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं है। जिन लोगों का उपचार अभी शुरू हुआ है या जो दवा के प्रति प्रतिरोधी हैं, उन पर इसका प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है। परीक्षण के दौरान कुछ हल्के साइड इफेक्ट्स जैसे सिरदर्द, मतली और दस्त की शिकायतें भी सामने आई हैं।
भारत के संदर्भ में, जहाँ सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली मुख्य रूप से दैनिक एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी पर निर्भर है, यह नई दवा भविष्य में एक बड़ी सुविधा साबित हो सकती है। अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो मरीजों को साल में 365 बार के बजाय केवल 52 बार दवा लेनी होगी। फिलहाल, यह दवा अभी मूल्यांकन के दौर में है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की स्पष्ट सलाह है कि एचआईवी पीड़ित व्यक्ति अपनी मौजूदा दवा को बिना डॉक्टर की सलाह के बिल्कुल न बदलें और नियमित इलाज जारी रखें।