केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने घोषणा की है कि स्कूली शिक्षा के अगले चरण के लिए कक्षा 10 से 12 तक की नई पाठ्यपुस्तकें 'मिशन मोड' में तैयार की जा रही हैं। दिल्ली में आयोजित एनसीईआरटी के 66वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान उन्होंने भविष्य की शिक्षा व्यवस्था और नई चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की।
शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि कक्षा 1 से 9 तक की पाठ्यपुस्तकें नई राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के अनुरूप पहले ही जारी की जा चुकी हैं। अब सरकार का ध्यान उच्च कक्षाओं के पाठ्यक्रम को आधुनिक और भविष्य के अनुकूल बनाने पर है। उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी को अधिक अभिनव, समावेशी और अनुसंधान-संचालित संस्थान बनने की आवश्यकता है।
आधुनिक तकनीक के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए, पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रह्लाद जोशी ने कहा कि बीते दो वर्षों में AI हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुका है, इसलिए छात्रों को इसके जिम्मेदार और सुरक्षित उपयोग के लिए तैयार करना जरूरी है। उन्होंने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि वे बच्चों की तकनीक तक पहुंच और उसके उपयोग पर निरंतर नजर रखें।
समारोह के दौरान शिक्षा मंत्री ने रोबोटिक्स लर्निंग सेंटर, ट्रांसलेशन लैब और अपग्रेडेड टेलीविजन स्टूडियो का भी उद्घाटन किया। इसके अलावा 'फ्लोरा एंड फौना एट एनसीईआरटी' नामक कॉफी-टेबल बुक का विमोचन किया गया और 'जादुई पिटारा' व 'दीक्षा' जैसे डिजिटल शिक्षा पहलों से जुड़ी प्रदर्शनी लगाई गई।
एनसीईआरटी अपनी बहुभाषी शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। कक्षा 1 से 8 तक की पुस्तकें संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में तैयार की जा रही हैं। इसके साथ ही भारतीय भाषाओं और आदिवासी बोलियों में भी शिक्षण सामग्री विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए गुणवत्तापूर्ण और भविष्य के लिए तैयार शिक्षा ही आधार है, जिससे देश के युवाओं को वैश्विक स्तर पर कुशल और सक्षम बनाया जा सके।