नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की पांच सदस्यीय पीठ ने सुभाष चंद्रा गोयनका के पुनर्भुगतान प्लान पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही, ट्रिब्यूनल ने उन्हें अपनी किसी भी संपत्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बेचने या स्थानांतरित करने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। यह आदेश एक अंतरिम निर्देश के तौर पर आया है, जिसके तहत ट्रिब्यूनल ने नोटिस जारी कर मामले को नए सिरे से सुनने का फैसला किया है।
मामला 2022 में इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस, जिसे अब सम्मान कैपिटल के नाम से जाना जाता है, द्वारा एक व्यक्तिगत गारंटी को लागू करने के आवेदन से शुरू हुआ था। यह गारंटी विवेक इन्फ्राकॉन के लगभग 170 करोड़ रुपये के ऋण के लिए दी गई थी। अप्रैल 2024 में ट्रिब्यूनल ने इस याचिका को स्वीकार किया था। इसके बाद जो पुनर्भुगतान प्लान सामने आया, उसे लेनदारों के 80.81 प्रतिशत वोट मिले थे, लेकिन बेंच के सदस्यों के बीच इसे लेकर गहरा मतभेद उभरकर सामने आया।
ट्रिब्यूनल के तीन सदस्यों ने इस योजना पर अलग-अलग राय दी थी। एक सदस्य ने इसे केवल सहमति देने वाले लेनदारों तक सीमित रखने की बात कही, दूसरे ने पूरी प्रक्रिया में गंभीर खामियां बताते हुए इसे खारिज कर दिया, जबकि तीसरे सदस्य ने इसे सभी लेनदारों पर बाध्यकारी करार दिया। इस असहमति के बाद अध्यक्ष ने पांच सदस्यीय पीठ का गठन किया, जिसने अब इस पूरी प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब तक की व्यवस्था में प्रमोटर गारंटी को सुरक्षा के बजाय केवल एक हस्ताक्षर के तौर पर देखा जाता रहा है। ट्रिब्यूनल के इस निर्देश ने पहली बार एक प्रवर्तक की संपत्ति को स्थानांतरित करने पर स्पष्ट कानूनी अंकुश लगाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति उस व्यवस्था की कमी को दर्शाती है जहाँ गारंटी को ऋण के साथ सही तरीके से नहीं जोड़ा गया था। अब ट्रिब्यूनल ने बिना किसी पुराने लोन अनुबंध के, अपनी शक्ति का उपयोग करते हुए यह अंतरिम रोक सुनिश्चित की है। फिलहाल, 22,006.57 करोड़ रुपये के दावों से जुड़े इस मामले में ट्रिब्यूनल का रुख साफ कर रहा है कि अब तक का कोई भी स्वीकृत आदेश प्रभावी नहीं है।