द्वारका के एक रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी से साइबर जालसाजों ने 30 लाख रुपये की ठगी की है। खुद को एटीएस, एनआईए और आरबीआई का अधिकारी बताने वाले इन ठगों ने पीड़ित को नवंबर 2025 में हुए रेड फोर्ट धमाके से जोड़कर डराया और 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर उन्हें घर में ही कैद रहने को मजबूर कर दिया। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पीड़ित को व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए लगातार निगरानी में रखा और फर्जी दस्तावेज दिखाकर गिरफ्तारी का डर दिखाया।
आरोपियों ने पीड़ित को भरोसा दिलाया कि उनका नाम आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के एक गंभीर मामले में सामने आया है। डर के कारण, पीड़ित ने अपनी जमा-पूंजी और फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़कर ठगों द्वारा बताए गए बैंक खातों में 30 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। जांच में सामने आया है कि इस राशि में से 15 लाख रुपये 'श्री बालाजी ट्रैक्टर' के नाम से चल रहे एक बैंक खाते में भेजे गए थे। पुलिस ने इस मामले में हरियाणा के फतेहाबाद निवासी सुनील सिंगला को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों का कहना है कि यह एक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का हिस्सा है जो अक्सर आतंकी जांच का हवाला देकर लोगों को अपना शिकार बनाता है। पकड़ा गया आरोपी पहले भी समान अपराधों में शामिल रहा है और जिस बैंक खाते का इस्तेमाल किया गया, वह अन्य सात साइबर ठगी के मामलों से भी जुड़ा पाया गया है। आजकल डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगी की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं, जिसमें बुजुर्गों को मुख्य रूप से निशाना बनाया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब अन्य फरार आरोपियों की तलाश कर रही है।