प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल ने भारत की 7.8% जीडीपी विकास दर को एक सकारात्मक आश्चर्य बताया है। उनका कहना है कि यह विकास किसी एक क्षेत्र पर निर्भर न रहकर कई क्षेत्रों के सामूहिक योगदान का परिणाम है। सान्याल ने विशेष बातचीत में स्पष्ट किया कि मैन्युफैक्चरिंग, वित्तीय सेवाओं और निर्माण क्षेत्र ने इस उपलब्धि में मुख्य भूमिका निभाई है। निवेश के मोर्चे पर भी स्थिति बेहतर है, जहाँ सरकारी निवेश के साथ-साथ निजी कंपनियों की ओर से भी निवेश की गति संतोषजनक बनी हुई है।
हालांकि, विकास की इस तेज रफ्तार को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। सान्याल ने आने वाली तिमाहियों के लिए वैश्विक अनिश्चितता, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अल नीनो को मुख्य जोखिम के रूप में रेखांकित किया। उनके अनुसार, ईरान में तनाव और वैश्विक व्यापार में आ रही बाधाएं भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि मध्य-पूर्व का क्षेत्र भारत के लिए एक महत्वपूर्ण निर्यात बाजार है और वहां की अस्थिरता का असर प्रत्यक्ष रूप से पड़ सकता है।
अल नीनो के कृषि क्षेत्र पर प्रभाव को लेकर उन्होंने कहा कि अभी मानसून की स्थिति स्पष्ट हो रही है, इसलिए सटीक आकलन करना जल्दबाजी होगी। वहीं, कच्चे तेल की कीमतों के चुनौती बने रहने पर सान्याल ने कहा कि भारत ने रूस, अमेरिका और वेनेजुएला जैसे विविध स्रोतों से आयात करके बाहरी ऊर्जा झटकों को काफी हद तक नियंत्रित किया है।
आम आदमी की स्थिति पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए सान्याल ने कहा कि बेरोजगारी और महंगाई को लेकर जो चिंताएं जताई जा रही हैं, वे जमीनी आंकड़ों से मेल नहीं खातीं। उन्होंने सरकारी श्रम सर्वेक्षण का हवाला देते हुए बताया कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बेरोजगारी धीरे-धीरे कम हो रही है। महंगाई के मोर्चे पर उन्होंने कहा कि 4-5% के स्तर को एक दशक पहले की 8-12% की तुलना में बेहतर माना जाना चाहिए। रिकॉर्ड कार बिक्री और एसी जैसे उत्पादों की मांग यह दर्शाती है कि उपभोक्ता खर्च अभी भी मजबूत है। अंत में, उन्होंने जीडीपी की नई कार्यप्रणाली का बचाव करते हुए कहा कि कोविड काल के बाद अब आर्थिक स्थिति सामान्य हुई है, जिससे आंकड़ों की विश्वसनीयता बढ़ी है।