बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में सुरक्षा और कूटनीति का मुद्दा सबसे प्रमुख रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए सदस्य देशों से आतंकवाद के खिलाफ एक सख्त और सामूहिक रुख अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने विशेष रूप से उन देशों की आलोचना की जो आतंकवाद को अपनी राज्य नीति के उपकरण के रूप में इस्तेमाल करते हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के वित्तपोषण और भर्ती जैसे मामलों में 'दोहरे मानकों' को अब स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी सुरक्षा को शीर्ष प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने सदस्य देशों से आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ के साथ-साथ सीमा पार से होने वाले संगठित अपराधों और मादक पदार्थों की तस्करी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए एकजुट कार्रवाई का आग्रह किया।
इस शिखर सम्मेलन के परिणामों पर चर्चा करते हुए भारत ने कुल 13 प्रमुख बिंदुओं को रेखांकित किया। इनमें सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए एक विशेष केंद्र की स्थापना और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय खतरों के खिलाफ सहयोग को और अधिक गहरा करने के उपाय शामिल हैं। सदस्य देशों ने सुरक्षा को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक मानते हुए भविष्य में ठोस कदम उठाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
यह सम्मेलन ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियां उभर रही हैं। कूटनीतिक चर्चाओं के दौरान क्षेत्र की जल सुरक्षा के महत्व पर भी चर्चा की गई, जहाँ यह रेखांकित किया गया कि पानी को कभी भी किसी विवाद में हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। शंघाई सहयोग संगठन के मंच से सुरक्षा और आतंकवाद पर बनी यह सहमति आने वाले समय में सदस्य देशों के बीच नीतिगत बदलावों की दिशा तय कर सकती है।