भारत में टमाटर की फसल इन दिनों जलवायु परिवर्तन के गंभीर दौर से गुजर रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि केवल बढ़ती गर्मी ही नहीं, बल्कि सही समय पर विपरीत मौसम का आना फसल के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIVR) के शोध के अनुसार, टमाटर की पैदावार तब प्रभावित होती है जब अत्यधिक तापमान या भारी बारिश उसके विकास के महत्वपूर्ण चरणों में बाधा डालती है।
टमाटर के पौधे फूल आने और फल बनने की प्रक्रिया के दौरान गर्मी के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं। 2026 में पंजाब में 76 टमाटर किस्मों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि 35°C से अधिक का तापमान फसल की वानस्पतिक और प्रजनन क्षमता के लिए हानिकारक है। इसी तरह, 38.4°C के तापमान में फूल विकास पर स्पष्ट नकारात्मक प्रभाव देखा गया है। गर्मी के अलावा, खेतों में अत्यधिक जलभराव और बेमौसम बारिश भी बड़ी मुसीबत है। मिजोरम में हुए अध्ययनों से संकेत मिलता है कि भारी बारिश के कारण टमाटर की पैदावार में लगभग 70% तक की गिरावट आ सकती है।
मध्य भारत में 2025 के एक शोध मॉडल ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में तापमान बढ़ने से फूल और फल आने की प्रक्रिया तो तेज हो सकती है, लेकिन कुल पैदावार में कमी आने की आशंका है। हालांकि, सभी टमाटर एक जैसे नहीं होते; शोधकर्ता अब ऐसी प्रजातियों पर काम कर रहे हैं जो अधिक गर्मी सह सकें। अगस्त 2026 में प्रकाशित एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने टमाटर के उन जीन प्रकारों की पहचान की है, जिनसे भविष्य में अधिक सहनशील किस्में विकसित की जा सकती हैं।
आम रसोई में दिखने वाले टमाटर पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। जलवायु परिवर्तन के कारण पैदावार में अनिश्चितता बढ़ने से इसकी आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि टमाटर पूरी तरह से गायब नहीं होंगे, लेकिन मौसम की मार के चलते इनकी खेती करना, आपूर्ति बनाए रखना और स्थिर दाम पर उपलब्ध कराना पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। आने वाले समय में टमाटर की थाली तक पहुंचने की कहानी काफी हद तक खेतों में बदलते इस मौसम पर निर्भर करेगी।