होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। मंगलवार को अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तैनात इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों को निशाना बनाकर हमला किया। यह कार्रवाई पिछले दो दिनों में हुई दूसरी बड़ी सैन्य स्ट्राइक है। इस हमले से पहले, वाशिंगटन ने आरोप लगाया था कि उक्त समूह क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों और अमेरिकी सैनिकों पर हमले की कोशिश कर रहा था।
इस सैन्य गतिरोध की शुरुआत दो दिन पहले हुई, जब अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। इस घटना ने क्षेत्र में पिछले एक महीने से बनी शांति को खत्म कर दिया है। इसके जवाब में ईरान ने रविवार के ऑपरेशन को एक घातक हमला करार देते हुए जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन के अनुसार, सोमवार सुबह उसके हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली आठ मिसाइलों को मार गिराया गया था।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि IRGC के जवान समुद्र में तैनात जहाजों को निशाना बनाने के लिए समुद्री खदानों से लैस रॉकेट लॉन्च करने की तैयारी कर रहे थे। ईरान ने इन हमलों में अपने जवानों के हताहत होने की पुष्टि की है और चेतावनी दी है कि वाशिंगटन को इसके सैन्य और आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है। हालांकि अमेरिका का दावा है कि जलमार्ग खुला है, लेकिन ताजा संघर्षों के कारण यहां व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही युद्ध-पूर्व स्तर से काफी नीचे आ गई है। इस नई सैन्य कार्रवाई ने लंबे समय से चले आ रहे तनाव को फिर से सीधे सैन्य टकराव में बदल दिया है। फिलहाल, अमेरिकी हमलों में हुए नुकसान और हताहतों की सटीक जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।