यमुना नदी और नहरों को औद्योगिक प्रदूषण से बचाने के लिए फरीदाबाद में बड़ी पहल की जा रही है। शहर में तीन कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) स्थापित किए जाएंगे, ताकि उद्योगों से निकलने वाले रासायनिक कचरे को यमुना में मिलने से पहले ही उपचारित किया जा सके। लगभग 400 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना की कुल क्षमता 90 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) होगी।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इन संयंत्रों को यमुना एक्शन प्लान के तहत विकसित किया जा रहा है। सबसे बड़ा प्लांट प्रतापगढ़ में बनेगा, जिसकी क्षमता 50 MLD होगी। इसके अलावा, 25 MLD क्षमता का प्लांट मिर्जापुर में और 15 MLD क्षमता का प्लांट बादशापुर में लगाया जाएगा। बादशापुर में वर्तमान में स्थित एक पुराने और जर्जर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को हटाकर वहां नई सुविधा का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना के लिए नगर निगम द्वारा जमीन उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि निर्माण का खर्च हरियाणा राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम द्वारा वहन किया जाएगा।
फरीदाबाद में करीब 30,000 औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं, जिनमें से कई रासायनिक कार्यों, रंगाई और एल्युमिनियम प्रसंस्करण से जुड़ी हैं। इन इकाइयों से प्रतिदिन 60 MLD से अधिक अपशिष्ट निकलता है। अभी भी कई उद्योगों में ट्रीटमेंट प्लांट लगे हैं, लेकिन उनके सही ढंग से संचालन न होने के कारण दूषित पानी अक्सर सीवेज नेटवर्क के जरिए यमुना और आगरा नहर तक पहुँच जाता है।
इस परियोजना के सफल होने से न केवल यमुना और नहरों के जल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि भूजल संदूषण का खतरा भी कम होगा। साथ ही, उपचारित पानी का उपयोग किसान सिंचाई के लिए कर सकेंगे और उद्योगों को भी अपने संचालन में दोबारा पानी इस्तेमाल करने की सुविधा मिलेगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन संयंत्रों का मुख्य उद्देश्य रासायनिक कचरे को ठिकाने लगाना और औद्योगिक जल को पुन: उपयोग के योग्य बनाना है।