मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने हाल ही में भारत के सहयोग से बन रहे थिलामाले पुल का निरीक्षण किया और इसे नई दिल्ली और माले के बीच के अटूट संबंधों का प्रतीक बताया। राष्ट्रीय अभियंता दिवस के अवसर पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने इस बुनियादी ढांचा परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। यह बयान उस दौर के ठीक उलट है जब मुइज्जू के सत्ता में आने के शुरुआती दिनों में भारत के साथ संबंधों में एक बड़ी दूरी देखी गई थी।
थिलामाले पुल, महत्वाकांक्षी ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट (GMCP) का मुख्य हिस्सा है। 6.7 किलोमीटर लंबे इस नेटवर्क का उद्देश्य राजधानी माले को विलिकाले, गुलहीफालहु और थिलाफुशी जैसे नजदीकी द्वीपों से जोड़ना है। पूरी तरह से भारत की आर्थिक सहायता—जिसमें 400 मिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन और 100 मिलियन डॉलर का अनुदान शामिल है—से बनने वाला यह प्रोजेक्ट एक बार पूरा हो जाने पर मालदीव की कनेक्टिविटी को पूरी तरह बदल देगा। अगस्त 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह द्वारा शुरू की गई इस परियोजना का निर्माण कार्य भारतीय कंपनी एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कर रही है।
मुइज्जू का यह रुख मालदीव की आर्थिक वास्तविकताओं को दर्शाता है। अपने चुनावी अभियान के दौरान उन्होंने भारत के साथ संबंधों को लेकर एक अलग रुख अपनाया था, लेकिन राष्ट्रपति बनने के बाद आर्थिक जरूरतों और नई दिल्ली द्वारा प्रदान की गई समय पर सहायता ने संबंधों को नई दिशा दी है। राष्ट्रपति मुइज्जू ने स्वीकार किया कि इस पुल का निर्माण दोनों देशों की तकनीकी टीमों के समर्पित प्रयासों से ही संभव हो पा रहा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत ने उनके देश को संकट के समय में हर संभव मदद पहुंचाई है। आज, मालदीव के विकास के लिए भारत का सहयोग वहां की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है, जिसने कड़वाहट के दौर को एक मजबूत साझेदारी में बदल दिया है।