पटना की रहने वाली 65 वर्षीय देवनी देवी ने अपनी मेहनत और कौशल से शून्य से शिखर तक का सफर तय किया है। 16 साल की उम्र में एक संयुक्त परिवार का हिस्सा बनीं देवनी देवी ने वर्षों तक घर के 25 सदस्यों के लिए खाना बनाने का अनुभव प्राप्त किया। यह घरेलू अनुभव ही आगे चलकर उनके व्यवसाय की नींव बना। साल 2002 में जब वह अपने बच्चों की शिक्षा के लिए पटना आईं, तो उन्होंने छात्रों की समस्याओं को करीब से देखा। उन्होंने महसूस किया कि घर से दूर रहने वाले छात्रों को घर जैसा खाना नहीं मिल पा रहा है। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए उन्होंने महज 20 रुपये में टिफिन सेवा की शुरुआत की।
शुरुआत में उन्होंने खुद ही खाना बनाना, पैक करना और छात्रों तक पहुँचाना शुरू किया। उनके काम के प्रति समर्पण को देखते हुए छात्र उन्हें प्यार से 'अम्मा' बुलाने लगे। इस दौरान उन्हें सामाजिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। जैसे-जैसे कमाई बढ़ी, उन्होंने 80,000 रुपये बचाकर आठ रिक्शे खरीदे। साल 2009 में उन्होंने 'समृद्धि गर्ल्स हॉस्टल' की स्थापना की। कोविड-19 के कठिन दौर में भी उन्होंने डॉक्टरों और जरूरतमंदों तक भोजन पहुँचाना जारी रखा।
वर्ष 2022 में उनके बेटे के सुझाव पर इस काम को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया, जिससे उनके व्यवसाय का दायरा काफी बढ़ गया। आज 'अम्मा किचन' के नाम से चल रहे इस उद्यम के पटना में दो डाइन-इन आउटलेट हैं और यहाँ 30 से अधिक लोग कार्यरत हैं। बिना किसी औपचारिक व्यावसायिक शिक्षा और बड़े मार्केटिंग प्लान के केवल गुणवत्तापूर्ण भोजन के दम पर खड़ा किया गया यह फूड बिजनेस अब सालाना लगभग 2.5 करोड़ रुपये का कारोबार कर रहा है। आज उनके द्वारा रोजाना करीब 350 ऑनलाइन ऑर्डर पूरे किए जाते हैं। देवनी देवी का यह सफर यह साबित करता है कि किसी भी कार्य में निरंतरता और लगन हो, तो घर की रसोई से शुरू हुआ छोटा सा कदम एक बड़े व्यापारिक साम्राज्य में तब्दील हो सकता है।