आखिरी समाचार अपडेट का समय 3:52 AM
📅
⚡ ब्रेकिंग
होमराष्ट्रीय › बिल्डरों के लिए सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी: ब्रोशर म…

बिल्डरों के लिए सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी: ब्रोशर में किए गए वादे मार्केटिंग नहीं, कानूनी जिम्मेदारी हैं

🇮🇳 राष्ट्रीय 📅 3 सितम्बर 2026 · By BolHind Bureau
बिल्डरों के लिए सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी: ब्रोशर में किए गए वादे मार्केटिंग नहीं, कानूनी जिम्मेदारी हैं
Photo: BolHindAI Team द्वारा निर्मित

सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट डेवलपर्स को स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रोजेक्ट ब्रोशर में किए गए दावे महज मार्केटिंग नहीं, बल्कि ग्राहकों से किए गए वादे हैं। अदालत ने कहा कि बिल्डरों को वही सुविधाएं और ढांचा प्रदान करना होगा, जिनका आश्वासन उन्होंने घर खरीदारों को बिक्री के समय दिया था। यह टिप्पणी गुरुग्राम के सेक्टर 82A में स्थित डीएलएफ के 'द प्रिमस' प्रोजेक्ट से जुड़े एक विवाद की सुनवाई के दौरान आई।

न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने प्रोजेक्ट की मूल योजना में हुए बदलावों पर गहरी नाराजगी जताई। विवाद का मुख्य बिंदु प्रोजेक्ट प्लान में दिखाया गया 24 मीटर चौड़ा रास्ता है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, मूल योजना में जो 24 मीटर चौड़ी सड़क दिखाई गई थी, वह वास्तव में उस स्वरूप में मौजूद नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस सड़क की नियोजित लंबाई का लगभग दो-तिहाई हिस्सा या तो ग्रीन पैच में तब्दील कर दिया गया है या फिर वहां पार्किंग बनी हुई है।

अदालत ने इस बदलाव को 'मामूली नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण' करार दिया है। पीठ ने कहा कि उनकी चिंता केवल सड़क तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा मसला है कि क्या खरीदारों को वही प्रोजेक्ट दिया जा रहा है, जिसका सपना उन्हें फ्लैट खरीदते समय दिखाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए चेतावनी दी कि यदि प्रोजेक्ट को मूल ब्रोशर और योजना के अनुरूप नहीं किया गया, तो अदालत उचित आदेश पारित करने में संकोच नहीं करेगी।

बता दें कि 'द प्रिमस' को 2012 के आसपास एक प्रीमियम आवासीय प्रोजेक्ट के रूप में प्रमोट किया गया था। इसमें अन्य सुविधाओं के साथ-साथ दो 24 मीटर चौड़ी सड़कों का भी वादा किया गया था। कुछ खरीदारों ने सड़क, पानी और बिजली के बुनियादी ढांचे में कमी को लेकर शिकायतें दर्ज कराई थीं, जिसके बाद मामला राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) से होता हुआ सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। कोर्ट ने इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई को निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को तय की गई है, जिस दिन अदालत जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट की प्रतीक्षा करेगी।

शेयर करें:

🇮🇳 देश की सभी बड़ी खबरें →
और खबरें लोड हो रही हैं…
— पिछले 3 दिनों की सभी खबरें दिखाई जा चुकी हैं —