अमेरिकी अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस नवीनतम कार्यकारी आदेश पर रोक लगा दी है, जिसका उद्देश्य जन्मसिद्ध नागरिकता के अधिकार को सीमित करना था। मैरीलैंड की अमेरिकी जिला न्यायाधीश डेबोरा एल बोर्डमैन ने इस आदेश के खिलाफ प्रारंभिक निषेधाज्ञा जारी की है। इस फैसले के बाद, यह नीति फिलहाल लागू नहीं हो सकेगी और अदालत ने स्पष्ट किया कि कानूनी रूप से अमेरिकी धरती पर पैदा होने वाले बच्चों को जन्म से ही नागरिकता प्राप्त है।
ट्रंप प्रशासन ने इस कार्यकारी आदेश को 'बर्थ टूरिज्म' को नियंत्रित करने के प्रयास के रूप में पेश किया था। आदेश के तहत उन बच्चों की नागरिकता को चुनौती देने का प्रावधान था जिनके माता-पिता गैर-आप्रवासी वीजा पर अमेरिका आते हैं या जिन्हें विदेशी दूतावासों या संगठनों से जुड़ा माना जाता है। अगस्त में जारी इस आदेश में उन लोगों को भी दायरे में लिया गया था जिन्हें अमेरिकी प्रशासन 'एलियन एनिमी' की श्रेणी में रखता है।
अदालत में दायर मुकदमे में प्रवासी परिवारों और अधिकार समूहों ने तर्क दिया था कि सरकार का यह कदम अस्पष्टता और भय पैदा कर रहा है। प्रभावित परिवारों का कहना था कि केवल अमेरिका में जन्म लेने या माता-पिता के किसी विदेशी संगठन से मामूली जुड़ाव के कारण बच्चों को नागरिकता से वंचित करने की आशंका पैदा हो गई थी। वकील शना खादर ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि व्हाइट हाउस को संविधान का सम्मान करना होगा और बच्चों के नागरिकता के अधिकार को छीनने की कोशिशें सफल नहीं होंगी।
न्यायाधीश बोर्डमैन ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा कानून के तहत जन्मसिद्ध नागरिकता का अधिकार सुरक्षित है। हालांकि प्रशासन के वकीलों ने तर्क दिया था कि इस आदेश को रोकना जल्दबाजी होगी और संघीय एजेंसियां आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करेंगी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया। अदालत ने साफ किया कि कार्यकारी आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किन श्रेणियों के बच्चों को नागरिकता दस्तावेज देने से इनकार करना है। यह मामला अब व्यापक कानूनी चुनौती के चलते आगे बढ़ेगा, लेकिन तब तक ट्रंप का यह विवादास्पद आदेश पूरी तरह से निलंबित रहेगा।