भारत निर्वाचन आयोग ने तीसरे चरण के तहत चल रहे विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम (SIR) के लिए अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की तारीखों में फेरबदल किया है। इस फेरबदल के कारण महाराष्ट्र, दिल्ली, कर्नाटक और तेलंगाना सहित कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन में 11 से 28 दिनों की देरी हुई है। आयोग द्वारा 14 मई को 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसके दायरे में 36.73 करोड़ मतदाता आते हैं।
आंकड़ों के अनुसार, सबसे लंबा विस्तार महाराष्ट्र को मिला है, जहां अंतिम प्रकाशन की तारीख 7 सितंबर से बढ़ाकर 4 नवंबर कर दी गई है। यानी यहां 28 दिनों की देरी हुई है। इसके अलावा, कर्नाटक और दिल्ली में 20 दिनों का विस्तार देते हुए नई तारीख 27 अक्टूबर तय की गई है। तेलंगाना में समय सीमा 18 दिन बढ़ाई गई है, जिससे अब वहां 19 अक्टूबर को सूची जारी होगी। वहीं, ओडिशा को 15 दिन और आंध्र प्रदेश, हरियाणा तथा पंजाब को 11-11 दिनों का अतिरिक्त समय मिला है।
इस तीसरे चरण के पुनरीक्षण अभियान में दिल्ली, ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम, मणिपुर, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, तेलंगाना, पंजाब, कर्नाटक, मेघालय, महाराष्ट्र, झारखंड, नागालैंड, त्रिपुरा और दादरा व नगर हवेली एवं दमन और दीव शामिल हैं।
समय सीमा में बार-बार हो रहे इन बदलावों को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि निर्वाचन आयोग की यह कवायद उन मतदाताओं को निशाना बनाने की एक रणनीति हो सकती है जो सत्ताधारी गठबंधन के साथ नहीं हैं। आयोग की ओर से हालांकि इसे प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत समय-समय पर होने वाले बदलावों के तौर पर देखा जा रहा है।