भादो के महीने की शुरुआत के साथ ही वाराणसी के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। शनिवार दोपहर के समय शहर के अधिकतर हिस्सों में जमकर बादल बरसे, जिससे भीषण उमस के बीच लोगों ने राहत की सांस ली। हालांकि, इस बारिश के कारण निचले इलाकों और कई सड़कों पर जलभराव की स्थिति भी बन गई। मौसम विभाग के जानकारों का मानना है कि बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र के चलते सितंबर के पहले दिन से मानसूनी गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।
बारिश के बीच काशी के लिए सबसे बड़ी चिंता गंगा का बढ़ता जलस्तर बना हुआ है। केंद्रीय जल आयोग के रविवार रात 8 बजे के आंकड़ों के अनुसार, राजघाट पर गंगा का जलस्तर 69.52 मीटर दर्ज किया गया है। नदी का पानी 4 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। गंगा का चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर पर निर्धारित है, जिससे नदी अब केवल 74 सेंटीमीटर दूर है।
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत चौकियों और शिविरों को सक्रिय कर दिया गया है। फिलहाल सरैया, सलारपुर और नख्खीघाट के इलाकों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बाढ़ के कारण अब तक 144 लोगों को विस्थापित होना पड़ा है, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं।
प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों के लिए प्राथमिक विद्यालय सलारपुर, सरैया और सिटी गर्ल्स स्कूल में तीन राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां 75 लोग शरण लिए हुए हैं। राहत और बचाव कार्य को गति देने के लिए छह नावें और एनडीआरएफ की एक टीम तैनात की गई है। प्रभावितों तक लंच पैकेट, फल, दूध के साथ ही ओआरएस और क्लोरीन टैबलेट जैसी जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं भी पहुंचाई जा रही हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जलस्तर में और वृद्धि होने की स्थिति में निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर तुरंत स्थानांतरित किया जाए।