लखनऊ में समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर लगाए गए एक पोस्टर ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इस होर्डिंग में कुछ लोगों को घुटनों के बल बैठा दिखाया गया है और धार्मिक प्रतीकों के साथ चंदा चोरी जैसे आरोपों को जोड़ने का प्रयास किया गया है। होर्डिंग में यह दावा किया गया है कि अयोध्या मंदिर को नुकसान पहुंचाने वालों का सर्वनाश किया जाएगा। इस पोस्टर के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
इस मामले पर मंत्री मनोज पाण्डेय ने कड़ा रुख अपनाते हुए समाजवादी पार्टी को घेरा है। उनका कहना है कि इस होर्डिंग में एक विशेष सामाजिक वर्ग की धार्मिक आस्था और प्रतीकों का अपमान किया गया है। उन्होंने इसे पूरी तरह से निंदनीय करार देते हुए कहा कि किसी भी समाज की धार्मिक पहचान और सम्मान के साथ खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेतृत्व से इस विवादित पोस्टर को तत्काल प्रभाव से हटवाने की मांग की है।
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी के प्रवक्ता डॉ. आशुतोष वर्मा ने इसे विरोधियों की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह पोस्टर सपा को बदनाम करने के इरादे से लगाया गया है। हालांकि, पोस्टर में किसी भी संगठन या व्यक्ति के नाम का उल्लेख नहीं होने के कारण इसे लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है।
शहर में यह होर्डिंग चर्चा का विषय बना हुआ है और राजनीतिक दल इस मुद्दे पर एक-दूसरे के आमने-सामने हैं। फिलहाल, विवादित पोस्टर के कारण उपजे इस माहौल पर स्थानीय प्रशासन और राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर बनी हुई है। इस घटनाक्रम ने शहर में राजनीतिक बयानबाजी को और तेज कर दिया है, जिससे आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।