एक फौजी अफसर ने दुनिया से विदा होने के बाद भी मानवता की अनूठी मिसाल पेश की है। चंडीगढ़ के रहने वाले इस आर्मी अफसर ने मरणोपरांत अपने अंगदान की इच्छा जताई थी। ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनके हृदय को एक जरूरतमंद मरीज के लिए दान कर दिया। इस धड़कते हुए दिल को चंडीगढ़ से नोएडा के फोर्टिस अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए एक विशेष ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।
इस पूरी प्रक्रिया में गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर पुलिस ने सराहनीय तालमेल दिखाया। दिल को हवाई मार्ग से गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट तक लाया गया। वहां से नोएडा सेक्टर-62 स्थित फोर्टिस अस्पताल तक की दूरी तय करना सबसे बड़ी चुनौती थी, क्योंकि अंगदान के मामलों में हर मिनट कीमती होता है। गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट में पहली बार बनाए गए इस ग्रीन कॉरिडोर की मदद से एंबुलेंस 9 सितंबर 2026 को दोपहर 2:03 बजे हिंडन एयरपोर्ट से रवाना हुई।
पुलिस की टीम ने पूरे 20 किलोमीटर के रास्ते को एंबुलेंस के लिए पूरी तरह क्लियर रखा, जिससे यातायात बाधित नहीं हुआ। इस तत्परता का नतीजा यह रहा कि महज 16 मिनट में एंबुलेंस बिना किसी रुकावट के अस्पताल पहुंच गई। समय पर अंग उपलब्ध होने से नोएडा के अस्पताल में भर्ती मरीज के हार्ट ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया आसान हो गई। पुलिस और अस्पताल प्रबंधन ने इस सहयोग को जीवन बचाने वाला एक महत्वपूर्ण अभियान बताया। पुलिस का कहना है कि अंगदान महादान है और किसी का दिया हुआ अंग किसी अन्य व्यक्ति को नया जीवन दे सकता है। इस पूरी कवायद के बाद अस्पताल स्टाफ और स्थानीय लोगों ने गौतमबुद्धनगर पुलिस की कार्यप्रणाली की जमकर सराहना की है।