लोकसभा चुनावों के दौरान उत्तर प्रदेश में सामने आए चुनावी परिणामों के बाद भाजपा अपनी संगठनात्मक तैयारियों को फिर से दुरुस्त करने में जुट गई है। पार्टी की आंतरिक समीक्षा में 18,900 ऐसे मतदान केंद्र चिन्हित किए गए हैं, जहां 2022 के विधानसभा चुनावों के मुकाबले 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन में गिरावट देखी गई। अब पार्टी इन बूथों को अपनी नई चुनावी रणनीति का केंद्र बिंदु बना रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस सूक्ष्म स्तर की रणनीति का उद्देश्य उन कारणों को समझना है जिनकी वजह से समर्थन में बदलाव आया। इन 18,900 बूथों में से लगभग 80 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। पार्टी अब बूथ-दर-बूथ डेटा का विश्लेषण कर रही है ताकि जमीनी स्तर पर मतदाताओं तक फिर से अपनी पहुंच बनाई जा सके। आगामी विधानसभा चुनावों की दृष्टि से भाजपा के प्रदेश प्रभारी 16 से 22 सितंबर तक उत्तर प्रदेश के दौरे पर रहेंगे, जिसमें इन प्रभावित क्षेत्रों को सुधारने की कार्ययोजना पर प्रमुखता से चर्चा की जाएगी। चुनावी आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि अवध और पूर्वांचल क्षेत्र भाजपा के लिए मुख्य चुनौती बने हुए हैं। 2022 में अवध क्षेत्र की 154 विधानसभा सीटों में से भाजपा 101 पर विजयी रही थी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों में उसकी बढ़त 51 सीटों तक सीमित रही। इसी तरह पूर्वांचल में भी 2022 की 53 सीटों की तुलना में 2024 में 36 सीटों पर बढ़त दर्ज की गई। पार्टी सूत्रों का कहना है कि सपा की PDA रणनीति और स्थानीय मुद्दों के प्रभाव के चलते कुछ क्षेत्रों में सामाजिक समीकरणों में बदलाव आया है। इसके अतिरिक्त, बुंदेलखंड, पश्चिम उत्तर प्रदेश और रुहेलखंड में भी स्थिति का बारीकी से आकलन किया जा रहा है। कुल 403 विधानसभा सीटों वाले इस राज्य में भाजपा अपनी 2022 की 255 सीटों की संख्या को आधार मानकर चल रही है, जबकि 2024 के रुझान उसे 161 सीटों तक लाते हैं। अब पार्टी का पूरा जोर उन्हीं 18,900 बूथों पर है जहां से जीत की राह वापस बनाई जा सके। डेटा आधारित इस माइक्रो-मैनेजमेंट के जरिए भाजपा यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि स्थानीय स्तर पर संगठन की कमजोरी को दूर कर फिर से जनाधार मजबूत किया जाए।