भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हरीश द्विवेदी को नई संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी गई है। हाल ही में उन्हें राष्ट्रीय महामंत्री बनाने के बाद अब पार्टी ने उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रभारी की अहम भूमिका दी है। पार्टी की ओर से बार-बार मिल रही जिम्मेदारियों के चलते राजनीतिक गलियारों में विभिन्न चर्चाएं तेज हो गई हैं। हरीश द्विवेदी का राजनीतिक सफर वर्ष 1991 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से शुरू हुआ था। इसके बाद वे 1993 से 1995 तक बस्ती के जिला प्रमुख रहे। संगठन में उनकी सक्रियता को देखते हुए उन्हें 1994 से 1996 तक भाजयुमो प्रदेश सह मंत्री और 2006 से 2010 तक प्रदेश उपाध्यक्ष का दायित्व मिला। इसके बाद 2010 से 2013 तक वे भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष पद पर भी कार्यरत रहे। चुनावी राजनीति की बात करें तो वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने जीत दर्ज की और सांसद बने। हरीश द्विवेदी की बढ़ती सक्रियता को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी उन्हें अहम भूमिकाओं में लाकर समीकरणों को साधने की दिशा में काम कर रही है। विशेषकर पूर्वांचल के प्रभाव वाले जिलों जैसे वाराणसी, गोरखपुर, जौनपुर, देवरिया, बस्ती, संत कबीर नगर और महाराजगंज में राजनीतिक संतुलन बनाने पर जोर दिया जा रहा है, जहाँ करीब 15 से 20 फीसदी आबादी ब्राह्मण समाज की है। इन इलाकों में इस वर्ग को एक प्रभावशाली वोट बैंक माना जाता है।