उत्तर प्रदेश में सिंचाई के लिए डीजल पंपों पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य के किसान अब PM-KUSUM योजना के तहत सोलर पंपों को अपना रहे हैं, जिससे न केवल खेती की लागत में कमी आ रही है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल सिंचाई व्यवस्था को भी बढ़ावा मिल रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को किफायती और भरोसेमंद ऊर्जा प्रदान करना है।
PM-KUSUM योजना के तहत तीन मुख्य COMPONENTS काम करते हैं। पहले Component A के अंतर्गत, बंजर या कृषि भूमि पर छोटे सोलर पावर प्लांट लगाए जाते हैं, जिनकी क्षमता 500 kW से 2 MW तक होती है। किसान इससे बिजली बनाकर DISCOMs को बेच सकते हैं। Component B के तहत, 7.5 HP तक के स्टैंडअलोन ऑफ-ग्रिड सोलर एग्रीकल्चर पंप दिए जाते हैं, जो उन क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं जहाँ ग्रिड की पहुंच सीमित है। वहीं, Component C का उद्देश्य मौजूदा ग्रिड-कनेक्टेड पंपों का सोलराइजेशन करना है।
UP में सब्सिडी की प्रक्रिया को काफी सरल और प्रभावी बनाया गया है। UPNEDA और UPPCL के समन्वय से चल रही इस व्यवस्था में, केंद्र सरकार द्वारा 30 प्रतिशत और राज्य सरकार द्वारा कम से कम 30 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती है। कुछ विशेष मामलों में, जैसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और बुंदेलखंड के प्राथमिकता वाले जिलों के किसानों को 90 प्रतिशत तक सब्सिडी का लाभ मिलता है। सामान्य और OBC वर्ग के किसानों के लिए कुल सब्सिडी 60 प्रतिशत तक होती है, जिससे किसानों पर वित्तीय बोझ काफी कम हो जाता है।
UP की प्रगति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य ने अब तक 53,182 स्टैंडअलोन सोलर पंप स्थापित कर लिए हैं। इस उपलब्धि के साथ, उत्तर प्रदेश इस श्रेणी में देश में तीसरे स्थान पर है। फिलहाल, 53,000 से अधिक पंपों के उपयोग से हजारों किसान डीजल के बढ़ते खर्चों से मुक्ति पा चुके हैं।
इस पहल का व्यापक प्रभाव कृषि क्षेत्र पर पड़ा है। डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से परेशान किसानों के लिए सौर ऊर्जा एक सुरक्षित विकल्प बनकर उभरी है। भारत सरकार ने इस कार्यक्रम के लिए 34,422 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता आवंटित की है, जिसका लक्ष्य 2026 तक पूरा करना है। यह योजना न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर रही है, बल्कि कृषि को आधुनिक ऊर्जा बुनियादी ढांचे से जोड़कर एक नए भविष्य की ओर ले जा रही है।