निशानेबाजों को आवंटित कारतूसों के इस्तेमाल और उनकी खपत पर अब उत्तर प्रदेश सरकार पैनी नजर रखेगी। पड़ोसी राज्य में खेल कोटे के तहत आवंटित कारतूसों के दुरुपयोग का मामला सामने आने के बाद, योगी सरकार ने इस दिशा में खुफिया जांच शुरू कर दी है। राज्य में खेल और निशानेबाजी को बढ़ावा देने के साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आवंटित संसाधनों का उपयोग केवल निर्धारित नियमों के भीतर ही हो।
प्रस्तावित नई नीति के तहत कारतूसों की खरीद और खपत का तीन-स्तरीय रिकॉर्ड रखा जाना अनिवार्य होगा। इसके अंतर्गत संबंधित निशानेबाज, शूटिंग क्लब और राइफल एसोसिएशन को कारतूसों की कुल खरीद, उनके उपयोग, खाली खोखों की संख्या और बची हुई मात्रा का स्पष्ट विवरण रखना होगा। इस कवायद का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खेल कोटे के नाम पर मिलने वाले कारतूसों का निजी स्तर या गलत कार्यों के लिए दुरुपयोग न हो सके।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, विदेशी आयात वाले कारतूसों पर भी अतिरिक्त निगरानी रखी जाएगी। राज्य में वर्तमान में .22 और .12 कैलिबर के कारतूसों का उपयोग निशानेबाजी स्पर्धाओं में होता है। 10 मीटर एयर राइफल और एयर पिस्टल में 4.5 मिमी (.177) पेलेट, 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में .32 बोर और 50 मीटर राइफल इवेंट में .22 एलआर कारतूसों का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, ट्रैप और स्कीट जैसी स्पर्धाओं में .12 बोर के शॉटगन कार्ट्रिज उपयोग में लाए जाते हैं।
इस विषय पर खेल विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि शूटिंग रेंज में ही सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था की जाए, तो कारतूसों की सुरक्षा और जवाबदेही और भी बेहतर हो जाएगी। इस नई नीति के लागू होने के बाद खेल कोटे के तहत शस्त्र लाइसेंस और कारतूस आवंटन की प्रक्रिया पहले से अधिक पारदर्शी और कठोर हो जाएगी। राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाएँ सुरक्षित रहें और उनका रिकॉर्ड पूरी तरह से अपडेट रहे।