उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में सरकारी अनाज के गायब होने का गंभीर मामला सामने आया है। Provincial Cooperative Federation (PCF) के दो खरीद केंद्रों से 228.764 मीट्रिक टन गेहूं कम पाया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 60 लाख रुपये बताई जा रही है। इस मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
घटना का खुलासा तब हुआ जब 11 सितंबर को जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी गोविंद कुमार उपाध्याय, सहायक आयुक्त (सहकारिता) अजय कुमार मौर्य और अतिरिक्त जिला सहकारी अधिकारी देवेंद्र प्रताप अग्रहरी की टीम ने B-PACS तुलसीपुर के दो खरीद केंद्रों पर औचक निरीक्षण किया।
पुलिस के अनुसार, पहले केंद्र पर रिकॉर्ड के मुताबिक 420.87 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई थी। इसमें से 353.759 मीट्रिक टन अनाज FCI को भेजा जा चुका था। शेष 67.111 मीट्रिक टन स्टॉक गोदाम में होना चाहिए था, लेकिन निरीक्षण के दौरान गोदाम की चाबियां नहीं मिलीं और खिड़कियों से देखने पर वह खाली प्रतीत हुआ। वहीं, दूसरे केंद्र पर 322.600 मीट्रिक टन की खरीद दिखाई गई थी, जिसमें से 160.947 मीट्रिक टन FCI को दिया गया। नियमानुसार वहां 161.653 मीट्रिक टन गेहूं मौजूद होना चाहिए था, लेकिन मौके पर कोई भी स्टॉक नहीं मिला।
इस मामले में PCF के जिला प्रबंधक अश्वनी शुक्ला की शिकायत पर तुलसीपुर पुलिस स्टेशन में केंद्र प्रभारी महेंद्र मणि तिवारी और प्रभारी सचिव प्रकाश सिंह के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी सचिव प्रकाश सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,605 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गायब हुए गेहूं की कुल कीमत करीब 60 लाख रुपये आंकी गई है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सरकारी अनाज कहां गया।