उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए आवंटित बजट का खर्च समय पर पूरा करना सरकार की प्राथमिकता में है। हालांकि, मौजूदा वित्तीय वर्ष के बीते 6 महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो विभागों द्वारा बजट खर्च करने की रफ्तार काफी सुस्त नजर आ रही है। कोषवाणी के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में कुल बजट के सापेक्ष मात्र 22.78% राशि ही खर्च की जा सकी है।
योगी सरकार ने इस वर्ष फरवरी में 9.12 लाख करोड़ रुपये का मूल बजट पेश किया था, जिसमें बाद में अनुपूरक बजट भी शामिल किया गया। कुल प्रस्तावित बजट 9.99 लाख करोड़ रुपये के सापेक्ष अगस्त तक 2.08 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जो सितंबर तक बढ़कर 2.27 लाख करोड़ रुपये पहुंच गए हैं। राज्य सरकार चाहती है कि चुनाव से पहले अधिसूचना लगने से पूर्व अधिक से अधिक परियोजनाओं को जमीन पर उतारा जाए।
मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को निर्देश दिए हैं कि नवंबर तक वित्तीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया तेज की जाए, क्योंकि चुनाव के चलते बाद में समय कम मिलेगा। इन प्रयासों का असर वित्तीय स्वीकृतियों में दिख रहा है, जहां अब तक बजट के सापेक्ष 4.46 लाख करोड़ रुपये की स्वीकृतियां जारी हो चुकी हैं, जो कि कुल बजट का 44.64% है। इसमें से 3.40 लाख करोड़ रुपये की राशि विभागों को आवंटित की गई है।
विभागों के स्तर पर प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। जहां आवास विभाग ने अपने आवंटित बजट का 95% खर्च कर लिया है, वहीं हथकरघा उद्योग ने 99.25% और लघु उद्योग एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग ने 65.40% बजट का उपयोग किया है। इसके विपरीत, कई विभाग ऐसे हैं जहां वास्तविक खर्च 10% से भी नीचे है। इनमें पर्यटन (2.82%), आपदा राहत (3.03%), जनजाति कल्याण (4.48%), और नियोजन (5.34%) जैसे विभाग शामिल हैं। पंचायतीराज और लोक निर्माण विभाग के भवन निर्माण मद जैसे क्षेत्रों में भी खर्च की गति धीमी है। सरकार के लिए अब शेष समय में खर्च की इस सुस्त गति को रफ्तार देना एक बड़ी चुनौती होगी ताकि विकास परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके।