उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा के स्तर को सुधारने और विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक नई निगरानी व्यवस्था की शुरुआत की है। इस व्यवस्था के अंतर्गत उच्च शिक्षण संस्थानों में शैक्षिक गुणवत्ता की निरंतर निगरानी की जाएगी। इसके लिए 'परफॉरमेंस, रैंकिंग, इवैलुएशन एंड मॉनिटरिंग ऑफ यूपी हायर एजुकेशन एकेडमिक नेटवर्क' यानी 'यूपी प्रमाण' पोर्टल को आधिकारिक रूप से लॉन्च किया गया है।
अब प्रदेश के सभी राज्य, राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त और स्ववित्तपोषित महाविद्यालय इस नई प्रणाली के दायरे में आएंगे। उच्च शिक्षा विभाग का उद्देश्य संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया, शिक्षण की गुणवत्ता, शैक्षणिक कैलेंडर का पालन, परीक्षा संचालन, मूल्यांकन और परिणामों का बेहतर पर्यवेक्षण करना है। नई व्यवस्था के तहत, विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को समय-समय पर निर्धारित सूचनाएं पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी और हर महीने अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंपनी होगी।
इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए प्रदेश को चार भौगोलिक क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। विभाग ने तीन विशेष सचिवों और एक संयुक्त सचिव को नोडल अधिकारी के रूप में नामित किया है, जो अपने क्षेत्रों के संस्थानों की मासिक रिपोर्ट तैयार कर सचिव उच्च शिक्षा को प्रस्तुत करेंगे। इसके साथ ही, नोडल अधिकारी अपने क्षेत्र के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों का आकस्मिक निरीक्षण भी करेंगे ताकि आवश्यक सुधार सुनिश्चित किए जा सकें।
संस्थानों की कार्यप्रणाली को परखने के लिए केपीआई (KPI) आधारित डैशबोर्ड समीक्षा व्यवस्था को लागू किया गया है। रिपोर्ट में पोर्टल के विभिन्न बिंदुओं और 26 केपीआई के आधार पर संस्थानों का आकलन किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से न केवल शैक्षिक कैलेंडर का अनुपालन सुनिश्चित होगा, बल्कि छात्र व शिक्षक उपस्थिति और अकादमिक गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा। अधिकारियों को इस नई व्यवस्था के तहत सतर्क रहने और पोर्टल पर दी गई सूचनाओं के सत्यापन के कड़े निर्देश दिए गए हैं।