उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की राह उतनी आसान नहीं दिख रही है। दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर अभी भी खींचतान बनी हुई है, जिससे सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। स्थिति यह है कि दोनों ही पार्टियां अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए आंतरिक सर्वे के आंकड़ों पर भरोसा कर रही हैं।
समाजवादी पार्टी ने अपनी रणनीति स्पष्ट करते हुए संकेत दिया है कि वे उन 111 सीटों पर खुद ही चुनाव लड़ेंगे, जिन पर पार्टी का वर्तमान में कब्जा है। पार्टी का जोर जीतने की क्षमता पर है और उन्होंने अपने अधिकांश मौजूदा विधायकों को फिर से चुनावी मैदान में उतरने के निर्देश दे दिए हैं। वहीं, कांग्रेस का रुख है कि वे राज्य के हर जिले में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहती हैं और 2024 के लोकसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन के आधार पर सीटों की मांग कर रही हैं।
गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2024 में मिली कामयाबी को दोहराने की है। हालांकि, बदली हुई परिस्थितियों में मतदाताओं का मूड और मुद्दे पहले से अलग हैं। कांग्रेस जहां 100 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की उम्मीद लगाए बैठी है, वहीं समाजवादी पार्टी पहले 2022 के फार्मूले के आधार पर सीटों का वितरण करना चाहती थी। अब चर्चा है कि यह संख्या 75 से 80 के बीच हो सकती है। सपा का स्पष्ट मानना है कि कांग्रेस को भाजपा द्वारा जीती गई सीटों पर ही फोकस करना चाहिए।
दोनों दलों के लिए जेन जी और महिला मतदाताओं को अपने पक्ष में करना एक बड़ी प्राथमिकता बन गई है। कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी युवाओं के बीच पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं, तो सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी अलग रणनीति के साथ काम कर रहे हैं। फिलहाल, जातीय समीकरणों को साधते हुए सही उम्मीदवारों के चयन पर ही गठबंधन का भविष्य टिका है। दोनों दल इस बात पर सहमत हैं कि उनके साझा आधार को और विस्तार देने की जरूरत है ताकि चुनावी वैतरणी पार की जा सके।