उत्तर प्रदेश के बुनकरों के लिए सरकारी खरीद का एक नया और बड़ा रास्ता खुल रहा है। प्रदेश सरकार ने यह निर्णय लिया है कि राज्य के सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में अब हथकरघा निर्मित उत्पादों का उपयोग किया जाएगा। इसके तहत बेडशीट, तकिया कवर और गाज बैंडेज की आपूर्ति स्थानीय स्तर पर की जाएगी।
हाल ही में खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने इस आपूर्ति व्यवस्था की गहन समीक्षा की। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के बुनकरों और उनसे जुड़ी सहकारी समितियों को एक बड़ा और स्थायी बाजार मिले, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके। यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उन निर्देशों का हिस्सा है, जिसमें सरकारी विभागों में हथकरघा उत्पादों की खरीद को अनिवार्य बनाने पर जोर दिया गया था।
योजना के अनुसार, उत्तर प्रदेश राज्य हथकरघा निगम लिमिटेड के माध्यम से इन चिकित्सा संस्थानों की आवश्यकताओं को पूरा किया जाएगा। बैठक में स्पष्ट किया गया कि उत्पादों की गुणवत्ता और समयबद्ध आपूर्ति को प्राथमिकता दी जाएगी। विभाग जल्द ही गुणवत्ता मानकों के निर्धारण, दर तय करने और क्रय आदेश देने की प्रक्रिया को अंतिम रूप देगा। इसके अलावा, हर चिकित्सा संस्थान में नोडल अधिकारी नियुक्त करने का प्रस्ताव है, जो हथकरघा उत्पादों की मांग और आपूर्ति के बीच समन्वय स्थापित करेंगे।
सरकार का मानना है कि सरकारी खरीद की इस नई व्यवस्था से न केवल हथकरघा उत्पादों की खपत बढ़ेगी, बल्कि बुनकरों को नियमित रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। यह कदम राज्य के पारंपरिक वस्त्र उद्योग को पुनर्जीवित करने और उसे आधुनिक बाजार से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इस पूरी प्रक्रिया को जल्द से जल्द क्रियान्वित किया जाए ताकि बुनकरों को इसका सीधा लाभ मिल सके।