सहारनपुर पुलिस ने नकली सिक्कों के एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जिसने बाजार में भारी मात्रा में नकली मुद्रा फैला रखी थी। पुलिस के मुताबिक, यह सिंडिकेट कथित तौर पर 20 रुपये के नकली सिक्कों के माध्यम से बाजार में 70 करोड़ रुपये की हेराफेरी कर चुका था। इस मामले में पुलिस ने गिरोह के 5 संदिग्ध सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिन्हें उस समय पकड़ा गया जब वे जिले में एक नई यूनिट स्थापित करने के लिए मशीनरी लेकर जा रहे थे।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह काफी संगठित था और इसका संचालन उत्तर प्रदेश, पंजाब और बिहार जैसे राज्यों में फैला हुआ था। गिरोह की क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके पास एक दिन में 10,000 से 12,000 नकली सिक्के बनाने वाली मशीनें थीं। इन नकली सिक्कों को कमीशन के आधार पर शराब की दुकानों, टोल प्लाजा और किराने की दुकानों के जरिए बाजार में खपाया जाता था। मुख्य रूप से शराब की दुकानें इनका बड़ा ठिकाना थीं।
पुलिस की कार्रवाई में 6,400 नकली सिक्के बरामद हुए हैं, जिनकी कुल कीमत 1.28 लाख रुपये है। इसके अलावा, लगभग 5 लाख रुपये मूल्य के अर्ध-निर्मित सिक्के और 6 सिक्का बनाने वाली मशीनें भी जब्त की गई हैं। गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य सरगना 50 वर्षीय उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह शामिल है, जो पंजाब के मोहाली में सुनार का काम करता था और 2001 से इस अवैध धंधे में शामिल था। उसके साथ गिरफ्तार अन्य लोगों में हिमांशु उर्फ गुल्लू, कुलदीप, अनुराग पाल उर्फ लंकेश और संतोष चौरसिया उर्फ जनार्दन शामिल हैं, जिनकी उम्र 30 से 40 वर्ष के बीच है।
पूछताछ में सामने आया है कि प्रत्येक नकली सिक्के को बनाने में लगभग 5 से 6 रुपये की लागत आती थी, जिसे गिरोह आगे एजेंटों को 12 से 15 रुपये में बेचता था। गिरोह के सदस्य अपना नेटवर्क बचाए रखने के लिए अलग-अलग भूमिकाएं निभाते थे। पुलिस अब बरामद 39 डाइस, मोबाइल फोन और दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि यह सिंडिकेट कितने समय से सक्रिय था और कितनी बड़ी खेप बाजार में पहुंचाई जा चुकी है। यह बरामदगी हाल ही में एक बैंक के करेंसी चेस्ट से हुई 17.29 करोड़ रुपये के नकली नोटों की बड़ी बरामदगी के कुछ दिनों बाद हुई है।