उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर हलचल तेज हो गई है। योगी सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने भाजपा के साथ गठबंधन पर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गठबंधन के भविष्य का निर्णय भाजपा के रुख पर निर्भर करेगा।
संजय निषाद ने कहा कि यदि भाजपा उनके लिए रास्ते बंद करती है या सीटें नहीं देती है, तो वह समाजवादी पार्टी के बारे में विचार करने के लिए स्वतंत्र हैं। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य जीत हासिल करना है और वे सहयोगी दलों के रूप में उन सीटों की मांग कर रहे हैं जो पिछले चुनावों में पार्टी हार गई थी। उनका तर्क है कि सहयोगी दलों को जीत दिलाने के लिए हारी हुई सीटों पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
हाल ही में संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात की थी, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया। हालांकि, निषाद ने इसे एक सामान्य शिष्टाचार भेंट बताया। उन्होंने यह भी साझा किया कि उन्होंने भाजपा के महामंत्री संगठन धर्मपाल से भी बैठक की है।
संजय निषाद का इतिहास गठबंधन की राजनीति में पुराना रहा है। वह 2018 के गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ चुके हैं, जहां उनके बेटे प्रवीण निषाद ने जीत दर्ज की थी। हालांकि, 2019 में सीटों के विवाद के चलते वे सपा से अलग हो गए और भाजपा के साथ जुड़ गए। भाजपा के साथ रहते हुए उनके बेटे ने 2019 में संतकबीरनगर से जीत हासिल की थी। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में भी वे भाजपा गठबंधन का हिस्सा रहे, जिसमें उनकी पार्टी के 6 प्रत्याशी जीते थे। वर्तमान में निषाद पार्टी भाजपा के साथ सत्ता में सहयोगी है और अब आगामी चुनावों के मद्देनजर सीट-शेयरिंग को लेकर पार्टी अपना पक्ष मजबूती से रख रही है।