उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को लेकर भाजपा ने अपनी रणनीति को पूरी तरह बदल दिया है। लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों से सबक लेते हुए पार्टी अब संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक धारदार बनाने में जुट गई है। इस नई कवायद का मुख्य उद्देश्य उन 18,900 बूथों को सशक्त करना है, जहां पिछले चुनावों की तुलना में पार्टी की पकड़ ढीली हुई थी। इनमें से करीब 80 फीसदी बूथ ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े हैं, जहां पार्टी अब स्थानीय मुद्दों और सामाजिक समीकरणों के जरिए अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश करेगी।
भाजपा की इस चुनावी बिसात में महिला, युवा और गरीब मतदाता सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होंगे। सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने वाले परिवारों तक सीधे पहुंच बनाने के लिए एक व्यापक संपर्क अभियान चलाया जाएगा। पार्टी का मानना है कि सरकारी लाभार्थियों से सीधा संवाद न केवल उनके बीच विश्वास को मजबूत करेगा, बल्कि विपक्ष के चुनावी नैरेटिव का मुकाबला करने में भी मदद करेगा। महिला सुरक्षा, स्वरोजगार, कौशल विकास और आवास जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं को मुख्य चुनावी एजेंडे के तौर पर पेश किया जाएगा।
पार्टी की ओर से आगामी 17 सितंबर से 'सेवा संकल्प अभियान' की शुरुआत की जा रही है, जो जनसंपर्क को और अधिक गति प्रदान करेगा। इसके अलावा, भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े 16 से 22 सितंबर तक उत्तर प्रदेश के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे उन कमजोर बूथों की समीक्षा करेंगे, जिनका प्रदर्शन 2022 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले 2024 में कमजोर रहा था। इस दौरान विपक्ष के सामाजिक समीकरणों की चुनौती का सामना करने के लिए भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर रही है। कुल मिलाकर, आगामी चुनाव में भाजपा का पूरा जोर संगठन की मजबूती और लाभार्थियों के साथ सीधा जुड़ाव स्थापित करने पर है।