नई दिल्ली में आयोजित यूपी-जापान निवेश सम्मेलन 2026 ने उत्तर प्रदेश की औद्योगिक आकांक्षाओं को नई दिशा दी है। इस महत्वपूर्ण आयोजन में जापान से आए 200 से अधिक सीईओ, प्रबंध निदेशक और वरिष्ठ उद्योग प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जो राज्य की बदलती आर्थिक तस्वीर को दर्शाता है। राज्य सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उत्तर प्रदेश अब विनिर्माण, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत तकनीक के क्षेत्र में एक प्रमुख निवेश गंतव्य बनकर उभरा है।
इस सम्मेलन की सबसे बड़ी घोषणा यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में 'जापानी सिटी' के निर्माण की रही। YEIDA के सेक्टर-5ए में 500 एकड़ भूमि पर विकसित होने वाली यह सिटी जापानी कंपनियों, उनके कर्मचारियों और स्थानीय इकोसिस्टम के लिए एक समर्पित केंद्र होगी। यह पहल जापानी निवेशकों को एक ऐसा वातावरण प्रदान करेगी जहाँ वे अपनी व्यावसायिक गतिविधियों के साथ-साथ आवासीय और सामाजिक आवश्यकताओं को भी पूरा कर सकेंगे।
निवेश के प्रति विश्वास जताते हुए, सम्मेलन के दौरान 3,195 करोड़ रुपये की दो बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं का वर्चुअल ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह संपन्न हुआ। इसमें एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड द्वारा सेक्टर-10 में 2,029 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है, जहाँ 154 एकड़ भूमि पर विनिर्माण इकाई स्थापित की जाएगी। इस प्लांट से हर वर्ष 60,000 ट्रैक्टरों का निर्माण होगा और लगभग 4,000 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। वहीं, स्पार्क मिंडा समूह भी अपने विस्तार के लिए 1,166 करोड़ रुपये का निवेश कर रहा है। सेक्टर-10 और सेक्टर-24 में स्थापित होने वाली यह इकाई हर साल 20 लाख यूनिट इलेक्ट्रॉनिक स्विच, सेंसर और अन्य ऑटोमोटिव घटकों का उत्पादन करेगी, जिससे लगभग 6,440 रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
राज्य सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और मेडिकल डिवाइस जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में जापानी भागीदारी का स्वागत किया है। बेहतर कानून-व्यवस्था और कनेक्टिविटी को आधार बनाकर उत्तर प्रदेश ने वैश्विक निवेशकों को यह आश्वस्त किया है कि राज्य उनके लिए एक आदर्श औद्योगिक साझेदार है। यह सम्मेलन न केवल भारत-जापान के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि राज्य के औद्योगिक क्लस्टर्स को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।