उत्तर प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। अब इन संस्थानों के प्राइमरी प्रभाग में सहायक अध्यापक बनने के लिए उम्मीदवारों को शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। इस नई व्यवस्था के तहत, राज्य सरकार ने शैक्षिक अर्हता में संशोधन करते हुए सरकारी गजट जारी कर दिया है, जिसकी सूचना माध्यमिक शिक्षा विभाग ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को भी दे दी है।
वर्तमान में राज्य के एडेड माध्यमिक स्कूलों में सहायक अध्यापकों के कुल 897 पद रिक्त हैं, जिनमें बालक संवर्ग के 473 और बालिका संवर्ग के 424 पद शामिल हैं। पहले इन पदों पर भर्ती के लिए स्नातक के साथ बीटीसी, डीएलएड या सीटी जैसे डिप्लोमा अनिवार्य थे, और योग्य उम्मीदवारों की कमी होने पर बीएड डिग्री धारकों को भी अवसर मिल जाता था। अब नियमों में बदलाव के बाद बीटीसी या डीएलएड के साथ टीईटी की अनिवार्यता लागू कर दी गई है।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने इस संबंध में शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देशित किया है कि वे भर्ती प्रक्रिया की आगे की कार्यवाही शुरू करें। विभाग द्वारा अधियाचन भेजे जाने के बाद, अब आयोग जल्द ही इन 897 पदों को भरने के लिए आधिकारिक विज्ञापन जारी करेगा। यह बदलाव शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता और पात्रता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है, जिससे भविष्य की शिक्षक भर्तियों में नई अर्हता के नियम प्रभावी रहेंगे।