उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI केवल एक किताबी विषय तक सीमित नहीं रहेगा। कानपुर स्थित छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) में संपन्न हुए AI Manthan 2.0 के बाद राज्यपाल ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि वे AI को अपनी शिक्षा, शोध और प्रशासनिक कार्यों का अभिन्न हिस्सा बनाएं। राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालयों को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कृषि और छात्र कौशल विकास जैसे क्षेत्रों को कवर करने वाले स्पष्ट और समयबद्ध AI रोडमैप तैयार करने की आवश्यकता है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों में तकनीकी कौशल विकसित करना है ताकि वे कक्षा में पढ़ाए जाने वाले सिद्धांतों के बजाय वास्तविक समस्याओं के समाधान खोजने पर ध्यान केंद्रित कर सकें। राज्यपाल ने छात्रों से अपील की कि वे AI को डर की नजर से न देखें, बल्कि इसे नवाचार के एक सशक्त साधन के रूप में अपनाएं। उन्होंने कहा कि तकनीक के दौर में रचनात्मकता और मानवीय संवेदनाओं का महत्व कम नहीं होता।
AI के व्यावहारिक उपयोग पर जोर देते हुए गणितीय समस्याओं के समाधान, डेटा विश्लेषण, स्मार्ट फार्मिंग, मौसम पूर्वानुमान और शुरुआती बीमारियों की पहचान जैसे विषयों को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही, जल संरक्षण और यातायात प्रबंधन जैसे सामाजिक मुद्दों पर भी छात्रों को AI आधारित समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
इस बदलाव के लिए शिक्षकों को भी तैयार किया जा रहा है। राज्यपाल ने जोर दिया कि AI को शिक्षकों के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि एक सहयोगी के रूप में देखा जाना चाहिए। इसके अलावा, डेटा गोपनीयता और साइबर सुरक्षा जैसे सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। भविष्य की कार्ययोजना को आगे बढ़ाने के लिए एक AI पॉलिसी एडवाइजरी ग्रुप और वाइस चांसलर्स का एक कार्यान्वयन समूह भी गठित किया गया है।
इससे पहले AI Manthan 1.0 के तहत प्रदेश के सात लाख से अधिक स्नातक छात्रों ने आधारभूत AI कोर्स पूरे किए हैं। अब सरकार का अगला लक्ष्य इन अनुभवों को संस्थानों के व्यापक कार्यक्रमों में तब्दील करना है, ताकि उच्च शिक्षा का एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हो सके जो नवाचार और वास्तविक समस्याओं के समाधान में सक्षम हो।