कटियारी इलाके में गंगा, रामगंगा और गंभीरी नदियों के जलस्तर में गिरावट के बाद ग्रामीणों के लिए एक नई चुनौती शुरू हो गई है। बाढ़ का पानी तो उतर गया है, लेकिन अपने पीछे गंदगी, कीचड़ और सड़ते जैविक पदार्थों का बड़ा ढेर छोड़ गया है। इससे पूरे क्षेत्र में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा काफी बढ़ गया है, जिससे लोग डरे हुए हैं।
बाढ़ का असर बेहद व्यापक था। इस आपदा की चपेट में 29 आबादी वाले गांव और करीब 100 कृषि प्रधान गांव आए थे। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस बाढ़ से प्रभावित होने वाली कुल आबादी 18 हजार से अधिक रही। अब जब हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं, तो किसानों और पशुपालकों के सामने सबसे बड़ी मुसीबत अपने मवेशियों के लिए हरा चारा जुटाने की है। बाढ़ के दौरान कृषि योग्य भूमि के डूबने और पानी भरने से चारा पूरी तरह नष्ट हो चुका है।
संकट की इस घड़ी में राहत कार्य भी जारी रहे। तहसील प्रशासन ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए प्रभावित गांवों तक मदद पहुंचाई और करीब 3300 राशन किट का वितरण सुनिश्चित किया। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पानी कम होना राहत की बात जरूर है, लेकिन असली संघर्ष अब शुरू हुआ है। खेतों में हुई बर्बादी की भरपाई और बीमारियों से बचाव के लिए उन्हें अभी लंबे समय तक मदद की दरकार है।
सवायजपुर की उप जिला अधिकारी शिवानी सिंह ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया है कि जिन किसानों की फसलों को बाढ़ के कारण नुकसान हुआ है, उनका सर्वे करवाया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि सर्वे के बाद प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा।