उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए प्रमुख एक्सप्रेसवे के किनारे 25,000 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रही है। इस भूमि का उपयोग प्रदेश भर में 27 Industrial Manufacturing and Logistics Clusters यानी IMLCs विकसित करने के लिए किया जाएगा। राज्य सरकार का लक्ष्य इस परियोजना के जरिए औद्योगिक विकास को नई ऊंचाई पर ले जाना है, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के संकल्प में बड़ी भूमिका निभाएगा।
इस दिशा में उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) ने अब तक 5,000 हेक्टेयर भूमि की पहचान कर ली है, जिसमें से 4,250 हेक्टेयर से अधिक भूमि का अधिग्रहण पूरा किया जा चुका है। वरिष्ठ अधिकारियों ने जिला प्रशासन को निर्देशित किया है कि वे IMLC ब्लूप्रिंट के तहत शेष भूमि के चिह्नीकरण की प्रक्रिया में तेजी लाएं। इस पहल का विस्तार लखनऊ, वाराणसी, बरेली, रामपुर, सीतापुर, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, भदोही, बुलंदशहर, मिर्जापुर, जौनपुर, सोनभद्र, चंदौली और बागपत जैसे जिलों तक है।
IMLC फ्रेमवर्क के अंतर्गत निवेशकों को न केवल आकर्षक दरों पर औद्योगिक भूखंड उपलब्ध कराए जाएंगे, बल्कि उन्हें बेहतर सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी, कुशल कार्यबल और प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी। यह ढांचा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत औद्योगिक पार्क विकसित करने की भी अनुमति देता है। सरकार औद्योगिक इकाइयों के वर्टिकल विस्तार को प्रोत्साहित करने के लिए 'फ्लैटेड फैक्ट्री' मॉडल पर भी जोर दे रही है।
यह अधिग्रहण प्रक्रिया प्रस्तावित Ground Breaking Ceremony (GBC) 5.0 से पहले तेज की गई है, जिसमें राज्य सरकार 8 ट्रिलियन के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की तैयारी कर रही है। राज्य की नोडल निवेश एजेंसी, Invest UP ने पहले ही 6 ट्रिलियन के प्रोजेक्ट्स की सूची तैयार कर ली है, जिसके GBC की तारीखें घोषित होने तक 8 ट्रिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गंगा एक्सप्रेसवे के साथ-साथ गोरखपुर लिंक और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे इस आर्थिक रोडमैप के प्रमुख स्तंभ हैं।