उत्तर प्रदेश में संस्कृत भाषा के संरक्षण और शिक्षा को नई दिशा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अक्टूबर 2024 में राज्य की संस्कृत छात्रवृत्ति योजना को पुनर्जीवित किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को प्राथमिक स्तर से लेकर स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई के लिए आर्थिक संबल प्रदान करना है। सरकारी प्रयासों का लक्ष्य संस्कृत को केवल सांस्कृतिक धरोहर के रूप में ही नहीं, बल्कि कंप्यूटर विज्ञान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक विषयों के साथ जोड़कर एक प्रासंगिक भाषा के रूप में स्थापित करना है।
पुरानी व्यवस्था में लाभार्थियों की संख्या 300 तक सीमित थी, जिसे नई योजना के तहत काफी व्यापक बनाया गया है। योजना के पुनर्गठन के समय इसमें 69,195 छात्रों को शामिल किया गया और इसके लिए 5.86 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई। इस विस्तार के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों को संस्कृत की पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना है।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने DBT का उपयोग शुरू किया है। इसके माध्यम से छात्रवृत्ति की राशि बिना किसी बिचौलिये के सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में पहुंचाई जाती है, जिससे प्रक्रिया में तेजी और जवाबदेही बढ़ी है। इसके अतिरिक्त, पुरानी प्रणाली में मौजूद आयु संबंधी बाधाओं को भी हटा दिया गया है, ताकि किसी भी चरण में अपनी पढ़ाई शुरू करने या फिर से जोड़ने वाले छात्र इसका लाभ उठा सकें।
यह योजना स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक के मान्यता प्राप्त संस्थानों में पढ़ रहे छात्रों के लिए उपलब्ध है। इसके साथ ही, राज्य सरकार पारंपरिक गुरुकुल व्यवस्था को पुनर्जीवित करने पर भी जोर दे रही है, जहां छात्रों को आधुनिक शैक्षिक परिवेश के साथ-साथ रहने और भोजन की सुविधा भी मिलेगी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी जैसे संस्थान इस पूरी प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं। आवेदन के लिए आधार विवरण, बैंक खाता, शैक्षणिक रिकॉर्ड और निवास प्रमाण जैसे दस्तावेज अनिवार्य हैं। यह पहल न केवल आर्थिक बाधाओं को कम करेगी, बल्कि नई पीढ़ी को भारत की प्राचीन भाषाई जड़ों से जोड़ते हुए भविष्य के लिए तैयार करेगी।