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उत्तर प्रदेश में स्वच्छता मिशन के नौ साल: बुनियादी ढांचे और व्यवहार में बदलाव

🗺️ उत्तर प्रदेश 📅 19 सितम्बर 2026 · By BolHind Bureau
उत्तर प्रदेश में स्वच्छता मिशन के नौ साल: बुनियादी ढांचे और व्यवहार में बदलाव
Photo by BolHind Team

उत्तर प्रदेश में स्वच्छता के मोर्चे पर पिछले 9 वर्षों में एक व्यापक बदलाव देखने को मिला है। साल 2017 से शुरू हुई सरकारी पहल के तहत राज्य ने न केवल स्वच्छता के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है, बल्कि लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने पर भी जोर दिया है। इस अभियान की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता का दायरा तेजी से बढ़ा है।

शहरी विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2017-18 तक शहरी क्षेत्रों में 3,09,924 व्यक्तिगत शौचालय निर्मित थे। यह संख्या 2018-19 तक बढ़कर 7,58,949 और अब 9,00,113 तक पहुंच गई है। यानी 2017-18 के बाद से 5.90 लाख से अधिक नए शौचालय बनाए गए हैं। केवल घरों तक ही सीमित नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर भी स्वच्छता का विस्तार हुआ है। SBM-U 1.0 के तहत प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में 10,000 से अधिक सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय बनाए गए, जिनसे 70,000 से ज्यादा टॉयलेट सीटें उपलब्ध हुई हैं। साल 2024-25 से अब तक 2,623 सार्वजनिक टॉयलेट और 1,104 यूरिनल सीटें और जोड़ी गई हैं, जिससे कुल अतिरिक्त सार्वजनिक स्वच्छता इकाइयों की संख्या 3,727 हो गई है।

ग्रामीण क्षेत्रों में SBM-G के तहत काम का स्वरूप ओडीएफ से आगे बढ़कर ओडीएफ-प्लस की ओर बढ़ चुका है। अब गांवों में ठोस और तरल कचरा प्रबंधन, जल निकासी और सामुदायिक भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। GOBARdhan जैसी योजनाओं के जरिए गोबर और जैविक कचरे को बायोगैस में बदलने का प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्वच्छता से जोड़ने का एक नया उदाहरण बन रहा है।

स्वच्छता के इस सफर ने महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा को भी नई मजबूती दी है। घरों में शौचालय होने से महिलाओं को बाहर जाने की निर्भरता से मुक्ति मिली है। कचरा प्रबंधन की दिशा में भी सरकार अब डोर-टू-डोर कलेक्शन और वैज्ञानिक निस्तारण जैसी चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। बुनियादी ढांचे का निर्माण और उसे बनाए रखने के लिए सामुदायिक सहभागिता ही इस मिशन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही है, जिसने पूरे प्रदेश में स्वच्छता के प्रति एक नई सोच को विकसित किया है।

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