उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव और जनगणना की संभावित समय-सीमा के टकराने के कारण प्रशासनिक स्तर पर तैयारियों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य में पिछले कुछ कार्यकालों से फरवरी-मार्च के दौरान विधानसभा चुनाव होते रहे हैं। इस बार फरवरी 2027 में प्रस्तावित जनगणना और विधानसभा चुनाव एक साथ पड़ने की संभावनाओं के मद्देनजर दिल्ली से मिले संकेतों के बाद प्रशासन ने जनगणना को पहले निपटाने की तैयारी तेज कर दी है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जनगणना का कार्यक्रम अब दिसंबर 2026 में निर्धारित किया गया है। योजना के मुताबिक, एक दिसंबर 2026 से जनगणना का कार्य शुरू होगा जो पांच जनवरी 2027 तक जारी रहेगा। इस प्रक्रिया के तुरंत बाद, महज पांच दिन के भीतर डेटा तैयार करके 10 जनवरी तक गृह मंत्रालय को भेजने का लक्ष्य रखा गया है। इस समयबद्ध कार्य के लिए निदेशालय और जिला प्रशासन के पास कुल 90 दिनों का समय शेष है, जिसे लेकर अधिकारियों की सक्रियता बढ़ गई है। जनगणना से जुड़ी तैयारियों में कार्मिकों का चयन, प्रशिक्षण, ड्यूटी निर्धारण और मानचित्रों के सत्यापन जैसे महत्वपूर्ण काम शामिल हैं।
चुनाव के साथ-साथ यूपी बोर्ड की प्रस्तावित परीक्षाओं के दबाव को देखते हुए ही जनगणना की समय-सारणी में यह फेरबदल किया गया है, ताकि दोनों महत्वपूर्ण कार्य बिना किसी बाधा के संपन्न हो सकें। लखनऊ स्थित निदेशालय में इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रशिक्षण सत्र और बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। जिला स्तर पर भी जिलाधिकारी ने सितंबर महीने में ही सभी आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
दूसरी ओर, प्रदेश के राजनीतिक दलों ने भी अपनी चुनावी सरगर्मी बढ़ा दी है। सत्ताधारी भाजपा के साथ-साथ समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने भी अपनी चुनावी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। विभिन्न राजनीतिक बैठकों और अभियानों की शुरुआत के साथ ही दलों ने दावा किया है कि चुनाव समय से पहले होने की स्थिति में भी वे पूरी तरह तैयार हैं। सरकार का मौजूदा कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त होने वाला है, जिसे देखते हुए प्रशासन और राजनीतिक दल दोनों ही अपने स्तर पर तालमेल बिठाने में जुटे हैं।