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गोरखपुर के 233 नए राजस्व गांवों में अब पास होंगे मकानों के नक्शे, GDA ने दी मंजूरी

🗺️ उत्तर प्रदेश 📅 2 सितम्बर 2026 · By BolHind Bureau
गोरखपुर के 233 नए राजस्व गांवों में अब पास होंगे मकानों के नक्शे, GDA ने दी मंजूरी
Photo: BolHindAI Team द्वारा निर्मित

गोरखपुर विकास प्राधिकरण के दायरे में आने वाले 233 नए राजस्व गांवों के निवासियों के लिए राहत की खबर है। प्राधिकरण की 131वीं बोर्ड बैठक में इन क्षेत्रों में भवनों के मानचित्र (नक्शे) स्वीकृत करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई है। इससे पूर्व, महायोजना-2031 (पुनरीक्षित) में स्पष्ट भू-उपयोग निर्धारित न होने के कारण इन इलाकों में मकानों के नक्शे पास होने में तकनीकी अड़चनें आ रही थीं, जिससे स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

प्राधिकरण अध्यक्ष एवं कमिश्नर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में शासन द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को अपनाने का निर्णय लिया गया। वर्ष 2020 में प्राधिकरण के सीमा विस्तार के बाद पिपराइच, पीपीगंज और मुण्डेरा बाजार नगर पंचायतों सहित इन 233 राजस्व गांवों को जीडीए के क्षेत्र में शामिल किया गया था। अब शासन की एसओपी के तहत प्राधिकरण इन क्षेत्रों में सर्वे कराएगा, जिसके बाद स्कूल, व्यावसायिक परिसर और आवासीय योजनाओं के लिए नियमानुसार मानचित्र पास किए जा सकेंगे।

बोर्ड ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि स्वीकृत मानचित्रों का लिखित विवरण सुरक्षित रखा जाए ताकि भविष्य में महायोजना के दौरान भू-उपयोग में कोई विसंगति न हो। इसके अलावा, बैठक में शहर के विभिन्न विकास कार्यों पर भी चर्चा हुई। रामगढ़झील के सुंदरीकरण को गति देते हुए नई फ्लोटिंग जेटी लगाने और 'नया सवेरा' प्रोजेक्ट के प्रवेश द्वार को और सुगम बनाने का निर्णय लिया गया।

प्राधिकरण ने अपनी पुरानी और जर्जर संपत्तियों के पुनर्विकास के लिए राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम लिमिटेड के प्रस्ताव को भी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही, खोराबार आवासीय योजना और गोरखनाथ क्षेत्र की बहुमंजिली परियोजनाओं के नाम भी परिवर्तित किए गए हैं। अब ईडब्ल्यूएस और एलआईजी आवास 'रुद्राक्ष एनक्लेव' तथा एमआईजी आवास 'मानसरोवर एनक्लेव' के नाम से जाने जाएंगे, जबकि कुश्मी एन्क्लेव का नाम बदलकर 'नवनाथ एन्क्लेव' कर दिया गया है। ठेकेदारों के पंजीकरण की प्रक्रिया को भी अब वर्ष में दो बार—मार्च और सितंबर में—खोलने का निर्णय लिया गया है ताकि कार्यप्रणाली में अधिक पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित की जा सके।

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