उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले का खुर्जा अपनी सदियों पुरानी सिरेमिक और पॉटरी कला के लिए विश्व विख्यात है। मुगल काल से चली आ रही यह परंपरा अब 'एक जिला, एक उत्पाद' (ODOP) योजना के तहत एक नई उड़ान भर रही है। सरकारी सहायता और बेहतर बुनियादी सुविधाओं के चलते यहाँ के स्थानीय कारीगर अब अपनी कला को केवल भारतीय सीमाओं तक ही सीमित नहीं रख रहे, बल्कि वैश्विक बाजारों तक अपनी पहचान पहुंचा रहे हैं।
इस उद्योग में बड़ा बदलाव ईंधन के स्रोतों में आए बदलाव से आया है। वर्षों से कोयले और डीजल भट्टियों पर निर्भर रहने वाले खुर्जा के लगभग 300-400 कारखानों ने अब गैस पाइपलाइन का रुख किया है। सब्सिडी वाली गैस मिलने से न केवल संचालन लागत में कमी आई है, बल्कि प्रदूषण की समस्या का भी समाधान हुआ है। सरकारी मदद के तहत गैस आधारित जनरेटर के लिए सब्सिडी भी 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है।
ODOP पहल के चार प्रमुख घटकों के जरिए इस उद्योग को संवारा जा रहा है। इसमें हर साल 50 नई इकाइयों की स्थापना या मौजूदा इकाइयों का आधुनिकीकरण और वित्तीय सहायता शामिल है। इसके अलावा, लगभग 400 लोगों को प्रतिवर्ष कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जाता है और उन्हें टूलकिट उपलब्ध कराई जाती है। निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बड़े उद्यमियों को प्रदर्शनियों में स्टॉल लगाने पर 75% तक लागत की प्रतिपूर्ति भी की जा रही है।
स्थानीय उद्यमियों के अनुसार, सरकार की इस सक्रिय भूमिका से नए उद्यमियों का इस क्षेत्र में जुड़ना आसान हुआ है। खुर्जा के व्यवसायों को सरकारी योजनाओं के तहत 2 करोड़ से 2.5 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता भी प्राप्त हुई है। भविष्य में एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रयोगशाला और कच्चे माल के बैंक की स्थापना की योजना है, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता जांच स्थानीय स्तर पर हो सकेगी और निर्यात के दौरान रिजेक्शन की समस्या कम होगी। पारंपरिक डिजाइनों को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप ढालकर खुर्जा की यह कला अब विश्व स्तर पर अपनी साख मजबूत कर रही है।