इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध भंडारण, परिवहन और बिक्री से जुड़े मामलों में एक अहम फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने 80 जमानत याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोडीन युक्त कफ सिरप का इस्तेमाल केवल चिकित्सीय उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है, तो उस पर एनडीपीएस (NDPS) कानून लागू नहीं होगा।
अदालत ने अपने आदेश में दो प्रमुख बिंदुओं को स्पष्ट किया है। पहला यह कि यदि कोई दवा विक्रेता या लाइसेंस धारक निर्धारित मात्रा वाली दवाओं की बिक्री वैध तरीके से मेडिकल उपयोग के लिए कर रहा है, तो इसे मादक पदार्थ नहीं माना जाएगा। हालांकि, यदि इन सिरप को नशे या तस्करी के इरादे से फर्जी दस्तावेजों या बोगस फर्मों के जरिए डायवर्ट किया जाता है, तो उसे मादक पदार्थ मानकर एनडीपीएस अधिनियम की धारा 21 के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कोर्ट ने यह भी माना कि यदि कोई रिटेलर बिना पर्चे के मामूली मात्रा में ऐसी दवा बेचता है, तो यह केवल ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट का उल्लंघन हो सकता है, न कि सीधे तौर पर एनडीपीएस का मामला। इसके चलते, हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त को निर्देश दिए हैं कि सभी ड्रग इंस्पेक्टरों को निर्देशित किया जाए कि वे मेडिकल स्टोर्स पर कमियां मिलने पर सीधे एनडीपीएस के तहत केस दर्ज करने से पहले संबंधित शासकीय अधिवक्ता से कानूनी राय जरूर लें।
इस मामले में कोर्ट ने उन ट्रक चालकों और छोटे विक्रेताओं को जमानत दी है, जो केवल सीलबंद पार्सल ले जा रहे थे और उन्हें सामग्री की अवैध प्रकृति की जानकारी नहीं थी। इसके विपरीत, अदालत ने उन आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं, जिनके खिलाफ जांच में फर्जी ई-वे बिल और बोगस फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये की कोडीन सिरप को अवैध रूप से बाजार में खपाने के ठोस साक्ष्य मिले थे। राज्य सरकार के अधिवक्ताओं ने इन याचिकाओं का कड़ा विरोध किया था, जिसके बाद कोर्ट ने विस्तृत व्याख्या के साथ यह निर्देश जारी किए हैं।