उत्तर प्रदेश में मानसून का मिजाज अगस्त महीने में पूरी तरह बदला हुआ नजर आया। जून और जुलाई में सामान्य से कम बारिश के बाद, अगस्त में हुई जोरदार बारिश ने पिछले तीन वर्षों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। राज्य में अगस्त के दौरान 292.2 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 106% अधिक रही। इस बेहतर बारिश ने राज्य के कृषि क्षेत्र को बड़ी राहत दी है।
इस सीजन के आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 जून से 31 अगस्त के बीच राज्य में औसत 593.1 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, जिसके मुकाबले 552.8 मिमी बारिश हुई है। यानी अब पूरे सीजन की कमी केवल 6.8% रह गई है। मौसम विभाग के अनुसार, अगस्त के दौरान बने कम दबाव के क्षेत्र और मानसून ट्रफ का असर सितंबर के शुरुआती दिनों में भी दिखेगा। इसके चलते 1 से 5 सितंबर के बीच प्रदेश के 47 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है।
बारिश की स्थिति पूरे प्रदेश में अलग-अलग रही। बुंदेलखंड में अगस्त के दौरान सामान्य से तीन गुना अधिक बारिश दर्ज की गई। वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश का आंकड़ा संतुलित रहा। इसके अलावा, लखनऊ और वाराणसी समेत 34 जिलों में मानसून की स्थिति सामान्य बनी हुई है। मौसम विभाग का यह भी अनुमान है कि जैसे-जैसे अल नीनो का असर तेज होगा, 15 सितंबर के बाद मानसून प्रदेश से वापसी शुरू कर सकता है।
अगस्त में हुई इस बारिश का सबसे बड़ा सकारात्मक असर खेती पर पड़ा है। धान की रोपाई का लक्ष्य 100.3% पूरा हो गया है। साथ ही बाजरा, मूंग, उड़द और तिल जैसी फसलों के लिए भी निर्धारित लक्ष्य प्राप्त कर लिए गए हैं। किसानों को अब रबी की बुवाई के लिए पानी की किल्लत की चिंता नहीं सताएगी। भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी को देखते हुए गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संत कबीर नगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच समेत कई जिलों में अलर्ट जारी किया गया है।