राजनीति में निष्ठा और संगठन के हित को सर्वोपरि रखते हुए BSP सुप्रीमो ने बड़ा कदम उठाया है। मायावती ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने नजदीकी रिश्तेदारों के मोह से ऊपर उठकर कार्य करने के पक्ष में हैं। उन्होंने BSP के संस्थापक कांशीराम का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह उन्होंने अपने परिजनों को राजनीति से दूर रखकर मिशन के लिए काम करने की अनुमति दी थी, उसी मार्ग का वे अनुसरण कर रही हैं।
आकाश आनंद को लेकर पार्टी का रुख फिर से कड़ा हुआ है। मायावती ने बताया कि आनंद कुमार के आग्रह पर ही उन्होंने आकाश को आगे बढ़ाया था, लेकिन शादी के बाद उनके व्यवहार और गतिविधियों में आए बदलाव के कारण उन्हें पार्टी से अलग करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि आकाश अब अपने ससुर के प्रभाव में हैं, इसलिए उन्हें दोबारा जिम्मेदारी देना पार्टी के लिए विश्वासघात होगा। इसी तरह की आशंका के चलते उनकी बहन दीपिका आनंद को भी फिलहाल पार्टी में कोई पद नहीं दिया जाएगा।
परिवार से अब केवल ईशान आनंद को ही आगे बढ़ाने की बात कही गई है। उन्हें पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी दी जाएगी, लेकिन मायावती ने यह भी साफ कर दिया है कि ईशान के भविष्य को लेकर कुछ भी निश्चित नहीं है। यदि उन्होंने भी पार्टी विरोधी कोई गंभीर कृत्य किया, तो उन्हें तुरंत बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में परिवार के किसी अन्य सदस्य को जिम्मेदारी देने के बजाय किसी वफादार और मिशनरी कार्यकर्ता को मौका दिया जाएगा।
इस निर्णय को सही ठहराने के लिए उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर का उदाहरण दिया। उन्होंने 23 फरवरी 1956 के एक पत्र का जिक्र किया, जिसमें डॉ. आंबेडकर ने अपने बेटे यशवंत आंबेडकर के प्रति भी सख्त रवैया अपनाया था। मायावती का स्पष्ट संदेश है कि आंदोलन के हित में व्यक्तिगत संबंधों से ऊपर उठकर कठोर निर्णय लेना अनिवार्य है। पार्टी की कार्यप्रणाली में परिवारवाद के लिए कोई स्थान नहीं है और भविष्य में भी कड़े अनुशासन का पालन किया जाएगा।