कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण में सामने आई खामियों के बाद अब लखनऊ विकास प्राधिकरण यानी LDA सख्त रुख अपना रहा है। प्राधिकरण ने निर्माण कंपनी PNC इन्फ्राटेक लिमिटेड को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यह कदम तब उठाया गया है जब कंपनी को पहले से ही LDA की महत्वपूर्ण ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के तहत शहीद पथ इंटरसेक्शन पर चार लेन फ्लाईओवर, लूप और रैम्प बनाने का ठेका दिया जा चुका है।
इस परियोजना के लिए 215.65 करोड़ रुपये का आगणन तैयार किया गया था और 19 मार्च 2026 को निविदा आमंत्रित की गई थी। तकनीकी बोली में चार बड़ी कंपनियां पात्र थीं, जिनमें PNC, जीआर इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स, एचजी इन्फ्रा इंजीनियरिंग और एनसीसी लिमिटेड शामिल थीं। वित्तीय बोली 7 मई 2026 को खोली गई, जिसमें 194.40 करोड़ रुपये की सबसे कम बोली लगाने वाली PNC इन्फ्राटेक को एल-1 घोषित किया गया।
प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि 27 मई 2026 को कंपनी के पक्ष में लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस जारी किया गया था। उस समय तक कंपनी के खिलाफ किसी भी तरह की प्रतिकूल कार्रवाई की जानकारी नहीं थी। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की गई थी। हालांकि, कंपनी को काम मिलने के करीब डेढ़ महीने बाद कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का उद्घाटन हुआ और उसके निर्माण में लापरवाही की शिकायतें सामने आईं। इसके बाद NHAI ने 3 सितंबर 2026 को PNC इन्फ्राटेक को तीन साल के लिए डिबार कर दिया।
इस घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए LDA ने PNC इन्फ्राटेक को शो-कॉज नोटिस जारी किया है। प्राधिकरण का स्पष्ट कहना है कि ठेका देने का निर्णय NHAI की कार्रवाई से कई महीने पहले लिया गया था। अब कंपनी के जवाब के आधार पर ही भविष्य की कार्रवाई तय की जाएगी। वर्तमान में कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे को लेकर यात्रियों को असुविधा हो रही है, क्योंकि यह सीधे कानपुर शहर से नहीं जुड़ता और जाजमऊ के रास्ते जाने वालों को अतिरिक्त समय लग रहा है।