अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं में अब बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मंदिर ट्रस्ट ने अपनी कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए मंदिर के सभी कर्मचारियों की कार्यकुशलता और पृष्ठभूमि की गहन समीक्षा करने का निर्णय लिया है। हाल ही में नियुक्त किए गए ट्रस्ट के सीईओ जितेंद्र मिश्र की पहल पर यह कवायद शुरू की गई है।
ट्रस्ट ने मंदिर के विभिन्न विभागों में कार्यरत सभी कर्मियों से उनका विस्तृत बायोडाटा मांगा है। इस जानकारी के जरिए कर्मचारियों की पारिवारिक स्थिति, वर्तमान आय, शैक्षणिक योग्यता और तकनीकी कौशल का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मंदिर के महत्वपूर्ण पदों पर तैनात व्यक्ति अपनी योग्यता के अनुरूप ही जिम्मेदारी संभाल रहे हैं या नहीं।
यह निर्देश केवल एक विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि दान काउंटर, यात्री सेवा केंद्र, सुविधा केंद्र, तीर्थक्षेत्र पुरम और तीर्थ क्षेत्र भवन जैसे प्रमुख स्थानों पर तैनात सभी कर्मचारी इस समीक्षा के दायरे में हैं। इसके अलावा, रामघाट स्थित मुख्य एकाउंट कार्यालय के कर्मियों से भी जानकारियां जुटाई जा रही हैं।
सूत्रों का कहना है कि बायोडाटा के आधार पर कर्मचारियों की कार्यकुशलता की समीक्षा की जाएगी। जांच के बाद योग्य और निष्ठावान कर्मियों को ही व्यवस्था में प्राथमिकता दी जाएगी। जो कर्मचारी अपने पद के अनुरूप उपयुक्त नहीं पाए जाएंगे, उन्हें अन्य विभागों में स्थानांतरित किया जा सकता है या सेवा से अलग भी किया जा सकता है। ट्रस्ट का मानना है कि मंदिर निर्माण के शुरुआती दौर में कई नियुक्तियां बिना औपचारिक प्रक्रिया के हुई थीं, जिसे अब नियमबद्ध किया जा रहा है।
हाल के दिनों में दान के चढ़ावे को लेकर हुई चोरी की घटनाओं ने भी ट्रस्ट की सख्ती को बढ़ाया है। अब परिसर में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को अत्यंत कड़ा कर दिया गया है। दान काउंटरों, कैश गणना कक्ष और प्रवेश द्वारों सहित पूरे परिसर पर 24 घंटे सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी रखी जा रही है। ट्रस्ट का स्पष्ट संदेश है कि मंदिर परिसर की व्यवस्था में अब केवल कुशल और ईमानदार लोगों की ही भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।