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विधायकों के रिपोर्ट कार्ड पर विनोद तावड़े की दो टूक, बूथ मजबूती के दिए मंत्र

🗺️ उत्तर प्रदेश 📅 21 सितम्बर 2026 · By BolHind Bureau
विधायकों के रिपोर्ट कार्ड पर विनोद तावड़े की दो टूक, बूथ मजबूती के दिए मंत्र
Photo: BolHindAI Team द्वारा निर्मित

गोरखपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में विधानसभा चुनाव प्रभारी विनोद तावड़े ने प्रदेश के विधायकों और दावेदारों के कामकाज की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने विभिन्न चरणों में भाजपा द्वारा कराए गए आंतरिक सर्वे रिपोर्ट के आधार पर जनप्रतिनिधियों को उनके रिपोर्ट कार्ड से अवगत कराया। बैठक में जब तावड़े ने बूथ स्तर की खामियों और कार्यकर्ताओं के साथ व्यवहार पर चर्चा की, तो कई मौजूदा विधायक और 2027 के चुनाव के दावेदार बगले झांकते नजर आए।

प्रभारी ने स्पष्ट किया कि 2017 और 2022 के प्रदर्शन से बड़ी जीत हासिल करने के लिए जमीनी स्तर पर सक्रियता अनिवार्य है। गोरखपुर क्षेत्र में 62 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से 2022 में पार्टी को 37 सीटों पर जीत मिली थी। तावड़े ने कहा कि जहां पार्टी कमजोर रही, वहां हार के कारणों पर होमवर्क करना होगा। उन्होंने जोर दिया कि बूथ की जिम्मेदारी सिर्फ कार्यकर्ताओं की नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों की भी है।

बैठक में जातीय समीकरणों के महत्व पर भी चर्चा हुई। तावड़े ने निर्देश दिया कि स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों और जाति के बड़े नेताओं के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखें। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से कहा कि वे केवल अपने निवास तक सीमित न रहें, बल्कि प्रवास करें और लोगों के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं। संगठन की बैठक में युवाओं, महिलाओं और सनातन सोच वाले परिवारों के साथ संपर्क बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

उन्होंने बूथवार प्रदर्शन की समीक्षा करते हुए कहा कि हर छोटा-बड़ा जनप्रतिनिधि बूथ की मजबूती के लिए जवाबदेह है। 2024 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को आधार बनाकर खामियों को प्राथमिकता के आधार पर सुधारा जाए। देर शाम तक चली इस मैराथन बैठक में उन्होंने पदाधिकारियों से आह्वान किया कि आगामी चुनौतियों के लिए अभी से कमर कस लें। तावड़े ने जीत का मूल मंत्र देते हुए सलाह दी कि हर कार्यकर्ता और पदाधिकारी को प्रतिदिन 3 से 4 परिवारों से सीधा संवाद करना चाहिए। यह कवायद 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों में बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जा रही है, ताकि पार्टी अपनी संगठनात्मक पकड़ को और अधिक मजबूत कर सके।

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