उत्तर प्रदेश आज तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था की नई पहचान बन चुका है। राज्य सरकार ने युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और डीप-टेक उद्योगों के लिए एक मजबूत धरातल तैयार किया है। कभी तकनीक के प्रति उदासीन रहने वाला यह प्रदेश आज डिजिटल क्रांति का केंद्र बनता जा रहा है, जिसका सीधा लाभ युवाओं को कौशल और रोजगार के रूप में मिल रहा है।
राज्य की विशाल युवा आबादी अब उसकी सबसे बड़ी ताकत है। लखनऊ में एआई सिटी के लिए भूमि चिह्नित की जा चुकी है और सात सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस के जरिए युवाओं को एआई, ब्लॉकचेन, 5जी और 6जी जैसी तकनीकों में दक्ष बनाया जा रहा है। डेटा के महत्व को समझते हुए गाजियाबाद में 30 मेगावाट क्षमता का ग्रीन डेटा सेंटर स्थापित किया गया है, जो पर्यावरण और आधुनिकता के बीच संतुलन का उदाहरण है। इसके अलावा 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश से आठ डेटा सेंटर पार्क भी विकसित किए जा रहे हैं।
मोबाइल फोन निर्माण में उत्तर प्रदेश ने आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिखी है। देश में बनने वाले कुल मोबाइल फोन का 55 प्रतिशत अकेले यूपी में निर्मित हो रहा है और देश की 60 प्रतिशत से अधिक इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट इकाइयां यहीं सक्रिय हैं। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है; यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली यूनिट की नींव रखी जा चुकी है। राज्य की सेमीकंडक्टर नीति-2024 के तहत इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड जैसी इकाइयां प्रदेश को एक भरोसेमंद साझीदार बना रही हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में 200 से अधिक कंपनियां सक्रिय हैं, जिनमें 43 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ है। इससे तीन लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। वहीं, रक्षा उत्पादन में लखनऊ की ब्रह्मोस एयरोस्पेस यूनिट प्रदेश का मान बढ़ा रही है। डिजिटल कनेक्टिविटी के मोर्चे पर 2,066 ग्राम पंचायतों तक ऑप्टिकल फाइबर पहुँच चुका है। लखनऊ की एचसीएल आईटी सिटी और सात एसटीपीआई आईटी पार्क के जरिए बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ किया जा रहा है। सात हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ उत्तर प्रदेश अब निवेश, नवाचार और तकनीक के नए केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर चुका है।